गर्मी ने इस बार बीते पांच सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। बीते सालों में अप्रैल के मध्य में जहां औसत तापमान 33 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, वहीं इस बार यह 43 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है।
मौसम वैज्ञानिक इसे ग्लोबल वार्मिंग का दुष्प्रभाव मान रहे हैं। इससे प्रचंड गर्मी, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की आशंका है। सर्दी के बाद जैसे ही गर्मी का मौसम आया तो औसत से अधिक तापमान होने के कारण किसानों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
अप्रैल माह में वेस्टर्न यूपी का अधिकतम तापमान औसतन 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, लेकिन इस बार अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है।
तापमान में औसत के मुकाबले पांच डिग्री से भी अधिक का इजाफा होने से मौसम का मिजाज बिगड़ने का खतरा मंडराने लगा है। रिकार्ड के मुताबिक बीते वर्षों में 2012 में अप्रैल मध्य में तापमान 33 डिग्री, 2013 में 35 डिग्री, 2014 में 35 डिग्री, 2015 में 37 डिग्री और 2016 में 38 डिग्री रहा है।
मुरादनगर कृषि अनुसंधान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार यादव का कहना है कि औसत तापमान में पांच डिग्री की बढ़ोतरी होना फसल चक्र के लिए बेहद घातक है। अधिक गर्मी पड़ने से हरी सब्जी की खेती समेत अन्य फसलों में नुकसान होने का खतरा बढ़ जाएगा।
वहीं मौसम वैज्ञानिक डॉ.नफीस चौधरी का कहना है कि मध्य अप्रैल में अधिकतम तापमान में औसत से पांच डिग्री की बढ़ोतरी होना मौसम चक्र के लिए बेहद घातक संकेत हैं, क्योंकि तापमान में बढ़ोतरी होते ही हवा का दबाव घटने लगा है।
इसकी भरपाई के लिए पश्चिम से ठंडी हवा आने पर वेस्टर्न यूपी में फिर से विक्षोभ बनने से बारिश, आंधी और ओलावृष्टि होने का खतरा मंडरा रहा है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. नफीस चौधरी का कहना है कि तापमान में हो रही असामान्य बढ़ोतरी के रूप में ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके चलते हवा का दबाव घटने से वेस्टर्न यूपी में लोकल साइक्लोन की स्थिति बनी हुई है। एक सप्ताह के भीतर तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी और ओलावृष्टि होने की संभावना है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि हीट स्ट्रोक में शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड प्रेशर घटने से नब्ज ढीली पड़ जाती हैं। इससे जीभ सूखने लगती है और समय पर इलाज न मिलने से हार्ट अटैक होने पर मौत तक हो जाती है।
तपिश भरी धूप और तेज गर्मी के दौरान आंखों में कंजक्टीवाइटिस नामक बीमारी हो सकती है। इसमें आंखों में दर्द, लाली और सूजन हो जाती है। इससे आंखों को बड़े स्तर पर नुकसान होता है। लापरवाही बरतने पर रोशनी भी जा सकती है।
गर्मी के मौसम में बच्चों में उल्टी-दस्त की बीमारी आम होती है। ऐसे में बच्चों की खास देखभाल की जरूरत होती है। दस्त उल्टी लगने पर बच्चे को पानी लगातार देते रहें। पानी की कमी के कारण डिहाईड्रेशन हो सकता है।
उत्तरी भारत में जून माह के दौरान तापमान सर्वाधिक रहता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग से मौसम चक्र में इतनी तेजी के साथ बदलाव आ रहा है कि अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही तापमान बढ़ोतरी ने कई साल पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
इससे इस बार जून की बजाए मध्य मई में ही पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने का अनुमान है। डॉ. नफीस चौधरी, मौसम वैज्ञानिक, पूर्व प्रिंसिपल किसान डिग्री कॉलेज, सिंभावली