शहर के बाजारों में मिलावटी तेल, मावा आदि का धंधा जोरों पर है। वहीं, स्टेशन पर बिकने वाले समोसा, पकौड़ी आदि की हालत भी ठीक नहीं है। रेलवे क्वार्टरों में बनाए जा रहे समोसे मानक की कसौटी पर कितने खरे उतरेंगे
यह तो तस्वीर देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, मामले से अधिकारी अंजान हैं। हापुड़ रेलवे स्टेशन माडल स्टेशन की श्रेणी में शुमार है। जबकि, सुविधाओं के लिए मुरादाबाद मंडल के तहत आने वाले इस स्टेशन को ए-वन श्रेणी में रखा गया,
लेकिन यहां खामियों की भरमार है। स्टेशन के अधिकांश स्टालों पर बिकने वाला खाना बेहद खराब है। यहां रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टरों में रसोई का धंधा चल रहा है। समोसे, कचौरी या अन्य खाद्य सामग्री रेलवे के क्वार्टरों में बनाए जा रहे है। जिसका कोई मानक नहीं है।
मानकों के विपरीत चलने वाली रसोई में गंदगी पसरी है। समोसे तैयार होने के बाद उन्हें जमीन पर ही रख दिया जाता है और ट्रेनों व स्टेशन पर यात्रियों को बेचा जाता है। सरकारी क्वार्टरों में चल रही इस रसोई से आला अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
एक और चौकाने वाली बात यह है कि इन रसोइयों में लाल सिलेंडर का प्रयोग किया जाता है जो घरेलू उपयोग के लिए होता है।
वहीं, एडीआरम संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। क्वार्टरों में चल रही रसोई गलत है। साथ ही गुणवत्ताहीन खाना बेचने वाले वेंडरों की भी जांच पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
खराब खाना सेहत के लिए हानिकारक है। मिलावटी तेल में तली जाने वाली कचौरी व समोसा पेट संबधी रोग दे सकता है।
डॉ. पराग शर्मा ने बताया कि ऐसे खाने से लीवर खराब हो जाता है। लीवर में सूजन, पेट दर्द, आंतों में सूजन जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। इसलिए खाने से पहले एहतियात जरूर बरतें।