ओवैसी पर हमले की चार साल से तैयारी कर रहे थे आरोपी
पिलखुवा। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के काफिले पर हमला करने के आरोपियों ने पुलिस कस्टडी रिमांड में कई अहम खुलासे किए हैं। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने रविवार सुबह दस बजे से 24 घंटे को आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। आरोपी पिछले चार साल से ओवैसी पर हमला करने की तैयारी कर रहे थे। योजना बनाने का मास्टर माइंड सचिन है, उसने शुभम के साथ मिलकर हमला किया था। दोनों के अलावा किसी और व्यक्ति का इस हमला से कोई लेना देना नहीं है। हालांकि पुलिस अभी और अनसुलझे सवालों की जानकारी में जुटी है।
दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे स्थित छिजारसी टोल प्लाजा पर गत तीन फरवरी की शाम करीब साढ़े पांच बजे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तोहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की गाड़ियों के काफिले पर दो हमलावरों ने फायरिंग कर दी थी। हमले के दौरान ओवैसी का काफिला मेरठ के किठौर में चुनावी सभा कर दिल्ली जा रहा था। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण इसकी गूंज दिल्ली तक गूंजी थी। पुलिस ने चार फरवरी को हमला के आरोपी सचिन और शुभम को जबकि 11 फरवरी को आरोपियों को पिस्टल मुहैया कराने वाले आलिम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने हमले के आरोपियों से पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के लिए न्यायालय में पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन किया था। जिस पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों का रविवार से 24 घंटे का रिमांड स्वीकृत किया था। इसी के चलते पुलिस ने सचिन और शुभम को सुबह दस बजे जेल से रिमांड पर लिया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अभिनव सिंह पुंडीर ने बताया कि दोनों आरोपियों ने ओवैसी पर हमला करने की योजना चार साल पहले बनाई थी, इसी के चलते वर्ष 2018 में मेरठ मुडांली के नगलामठ गांव निवासी आलिम से पिस्टल और गोली खरीदी थी। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में हिंदूवादी नेता बनने के लिए हमला करने का अपराध स्वीकार किया है। इसका मास्टरमाइंड सचिन है, दोनों के द्वारा किया और कोई शामिल नहीं है। आरोपियों के मोबाइल कहां हैं और हथियार सप्लाई करने वाला इनके संपर्क में कैसे आया जैसे सवालों के जवाब भी पुलिस तलाश रही है।