बंद फैक्टरियां शुरू कराने के लिए मजदूरों का हल्लाबोल
पिलखुवा। टेक्सटाइल सिटी में सीईटीपी बंद होने के कारण तीन दिन से फैक्टरियां बंद हैं। जिसके चलते सैकड़ों मजदूरों पर रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा है। शनिवार को नाराज मजदूरों ने फैक्टरियां खुलवाने के लिए प्रदर्शन किया। वहीं व्यापारियों के संगठन ने राष्ट्रीय गंगा मिशन के महानिदेशक को पत्र भेजकर समस्या का समाधान करने की मांग की हैं।
पिलखुवा टेक्सटाइल सिटी में 200 फैक्टरियां स्थापित करने के लिए उद्यमियों को प्लाट आवंटित किये गये थे। जिसमें से लगभग 80 फैक्टरियां संचालित हो रही है। फैक्टरियों से निकलने वाले दूषित पानी का शोधन करने के लिए हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा एकीकृत जलशोधन संयंत्र (सीईटीपी) को भी स्थपित किया गया था, जिसका उसी के द्वारा संचालन किया जा रहा था। उक्त प्लांट का दिसंबर 2020 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्लांट में 15 बिंदुओं पर खामियां पाई गई थी। इसके चलते राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा द्वारा प्लांट को तत्काल बंद करने के निर्देश एचपीडीए को दिए थे। जिस पर एक अप्रैल को एचपीडीए द्वारा सीईटीपी को बंद कर दिया गया। सीईटीपी बंद होने के साथ ही प्रशासन द्वारा संचालित सभी फैक्टरियों को बंद करा दिया गया। इसके चलते फैक्टरियों में कार्यरत सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। तभी से लगातार फैक्टरिया बंद चल रही है। शनिवार को मजदूर फैक्टरियों का संचालन शुरू होने की उम्मीद लेकर टेक्सटाइल सिटी पहुंचे, लेकिन ताला लगा देख मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया, और उन्होने प्रदर्शन कर फैक्टरियों का शीघ्र संचालन शुरू करने की मांग की। आक्रोशित मजदूरों को फैक्टरी संचालकों ने समझा कर शांत कराया और शीघ्र ही समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस चौहान का कहना है कि संघ की तरफ से राष्ट्रीय गंगा मिशन के महानिदेशक को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की हैं। उन्होने कहा कि अगर शीघ्र ही बंद फैक्टरियों का संचालन शुरू नहीं हुआ तो उद्यमियों के साथ-साथ मजदूरों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। उन्होने कहा कि एचपीडीए की लापरवाही का परिणाम उद्यमियों को झेलना पड़ रहा हैं।