विदेशी पक्षियों से गुलजार हुआ एनटीपीसी पक्षी विहार
धौलाना। एनटीपीसी विद्युत नगर स्थित पक्षी विहार में इन दिनों विदेशी एवं विलुप्त प्राय पक्षियों का जमावड़ा लगा हुआ है। यह पक्षी मौसम अनुकूल होने पर अपने स्थानों को छोड़कर यहां डेरा डाले हुए हैं। इस पक्षी विहार में हर साल विभिन्न प्रजातियों के विदेशी पक्षियों के पहुंचने का आंकड़ा बढ़ रहा है।
डेढ़ दशक पहले वर्ष 2006 की गुलाबी सर्दी की शुरुआत में प्रवासी पक्षियों का यहां आना शुरू हुआ था। इस स्थान पर प्रवासी पक्षियों की जनगणना के सर्वे को यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम द्वारा मान्यता प्रदान किया गया है। पर्यावरण संरक्षण एवं बायोडाइवर्सिटी के दृष्टिगत विकसित पक्षी विहार में हर साल अक्तूबर और मार्च में बड़ी संख्या में माइग्रेटरी बर्ड्स की उपस्थिति देखने को मिलती है। 28 एकड़ में फैले पक्षी विहार वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों जैसे बतख, गीज एवं अन्य प्रजातियों के प्रवास के लिए सुरक्षित स्थान है।
सुरक्षित ठिकाना
एनटीपीसी जन संपर्क विभागाध्यक्ष पंकज नारायण सक्सेना ने बताया कि पक्षी विहार में माइग्रेटरी बर्ड्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए जनगणना करवाने की व्यवस्था की गई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुरोध पर यूएनडीपी के नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट एवं बायोडाइवर्सिटी डिवीजन द्वारा प्रवासी पक्षियों का जनगणना सर्वे किया गया। पक्षी विहार में पहली बार माइग्रेटरी बर्ड्स की जनगणना एशियन वाटरबर्ड्स सेंसस (एडब्ल्यूएस) यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) द्वारा 2015-16 जनवरी, 2021 के दौरान करवाई गई। इस सर्वे में पक्षी विहार में माइग्रेटरी बर्ड्स की 45 प्रजातियां और 6 विलुप्तप्राय प्रजातियां रिकार्ड की गईं। यूएनडीपी की रिपोर्ट के अनुसार प्रवासी पक्षियों में फेरुजिनस, पोचार्ड 30, कॉमन पोचार्ड 30 एवं इजिप्शिन वल्चर्स 2 संकटग्रस्त एवं विलुप्तप्राय प्रजातियां शामिल हैं। इन प्रवासी पक्षियों की पसंद मुख्यत: उथली सतह और भोजन में कीड़े-मकौडे़ व वनस्पति रहती है। मछली, कीट, पतंगें और झील की हरी घास इनका भोजन है।
पर्यावरणविद् राहुल सिंह ने बताया कि विदेशी परिंदों का यहां लगभग चार से पांच माह प्रवास रहता है। ठंडे क्षेत्रों में शीत ऋतु के दौरान बर्फ के जमने से इन पक्षियों के सामने आहार की समस्या आ जाती है। साथ ही प्रजनन के लिए यह गर्म देशों की ओर प्रवास करते हैं। प्रजनन होने के कारण लौटते समय इनकी संख्या में भी इजाफा हो जाता है।