हापुड़ में बनेगा डीपीआईसी सेंटर, शासन से मिली मंजूरी
हापुड़। जन्म से असाध्य रोग लेकर जन्मे बच्चों के उपचार के लिए अब हापुड़ में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीपीआईसी) की स्थापना होगी। शासन से हरी झंडी मिल गई है, जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। पहल साकार हुई तो बच्चों को नया जीवन मिल सकेगा, अभी तक जिले में जन्में ऐसे बच्चों को दूसरे जिलों में उपचार दिलाना पड़ता है।
बहुत से परिवारों में नवजात बच्चे जन्म से ही दिल में छेद, टेढ़े पैर, कटा तलवा, कमर में फोड़ा जैसी बीमारी लेकर जन्म लेते हैं। इन बीमारियों के साथ बच्चों का दीर्घायु पाना मुश्किल होता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चों को स्वास्थ्य विभाग निशुल्क उपचार दिलाता है। लेकिन इसके लिए बच्चों को अलीगढ़, मेरठ, दिल्ली रेफर कराना पड़ता है।
जिले में डीपीआईसी सेंटर बनाने के लिए स्थानीय अधिकारियों ने प्रस्ताव शासन में भेजा था। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल डॉ.मयंक ने बताया कि शासन ने प्रस्ताव पर हरी झंडी दे दी है, अब डीपीआईसी सेंटर के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जिला अस्पताल में भी इसका निर्माण हो सकता है, जिसका प्रयास सीएमओ द्वारा किया जा रहा है। इस सेंटर की स्थापना से गरीब बच्चों को नया जीवन मिल सकेगा।
इन बीमारियों का होगा इलाज
दिल में छेद, कटा होठ/तालू, क्लब फुट, जन्मजात मोतियाबिंद, कान बहना, कुपोषित बच्चे, कुष्ठ एवं क्षय रोग, दांत संबंधी परेशानी, फोड़ा, पोषण का स्तर, गला, त्वचा, शारीरिक जांच।
14 अति कुपोषित बच्चों को कराया भर्ती
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अति कुपोषित बच्चे हमजा, खुशबू, मायरा, शिदरा, वाजिहा, सुहाना, आहिल, इनाया, फिजा, अरहाना, आफताब, आयशा, मायरा को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन बच्चों का वजन बेहद कम है, जिला अस्पताल में अलग से वार्ड की व्यवस्था करायी गई है।
तीन बच्चों के दिल की हुई है सर्जरी
बेहद गरीब परिवारों में जन्में तीन बच्चों के दिल में छेद होने पर, स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दिल की सर्जरी करायी है। प्राइवेट अस्पतालों के अंदर इस सर्जरी में 10 से 15 लाख खर्च आता है, तीनों बच्चे अब स्वस्थ हैं।
जल्द बनेगा डीपीआईसी सेंटर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जल्द ही जिले में डीपीआईसी सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए स्थान की तलाश की जा रही है, जन्म से असाध्य रोग लेकर जन्में बच्चों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
- डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।