श्रीराम को जानने के लिए बाल्मीकि रामायण पढ़ें : डॉ वीरपाल
हापुड़। आर्य समाज मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व तर्कशास्त्री रामचंद्र देहलवी की जयंती पवित्र वेद मंत्रों से यज्ञ के साथ मनाई गई। यज्ञ के ब्रह्मा धर्माचार्य धर्मेंद्र शास्त्री रहे और यज्ञमान मदनलाल आर्य व विवेक गर्ग सपत्नी रहे।
गाजियाबाद से पधारे वैदिक विद्वान डॉ वीरपाल वेदालंकार ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीराम चंद्र महाराज के अनेकों प्रेरणा प्रद प्रसंगों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि श्रीराम को जानने के लिए महृषि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का अध्ययन करना चाहिए। महृषि बाल्मीकि ने महृषि नारद से पूछा था कि इस समय पृथ्वी पर ऐसा कौन नर है जो वेद वेदांगों का तत्वज्ञ, सभी शस्त्रों में अति निपुण, सचारित्रवान, प्रतिभाशाली, न्यायकारी, दयालु आदि गुणों से सम्पन्न हो। उन्होंने बताया कि महृषि नारद ने कहा इस समय भू मण्डल पर रघुकुल के दशरथ नंदन श्रीराम है ,जिनमें यह सभी गुण है। तब महृषि बाल्मीकि ने श्रीराम के जीवन चरित्र पर रामायण की रचना की।
शास्त्रार्थ महारथी रामचन्द्र देहलवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देहलवीजी कुरान की आयतों का स्वसुर गायन करते थे कि मौलवी भी कहते थे कि हे ख़ुदा एक काफिर को ये कैसा हुनर दे दिया जो इस प्रकार कुरान की आयतें सुनाता है। देहलवीजी के सामने कोई भी बड़े से बड़ा दूसरे मत का विद्वान अपने मत की ढींगे मारने की हिम्मत नहीं करता था। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंत्री अनुपम आर्य ने कहा कि हमे अपने महापुरुषों के जीवन से सिख लेकर अपने मन, मस्तिष्क में धारण करना चाहिए। तभी हम सच्चे धर्म व देशभक्त बन सकते है।
इस दौरान प्रधान नरेंद्र आर्य, संरक्षक आनंद प्रकाश आर्य, विजेंद्र गर्ग, सुरेश सिंघल, संजय शर्मा, सुंदर लाल आर्य, कुंवर पाल आर्य, मुकेश गोयल, माया आर्य, पुष्पा आर्य, अलका सिंघल, वीना आर्य, सुषमा गोयल उपस्थित रहे।