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ऊर्जा निगम का एमईएस बाबूगढ़ के एस्टीमेट में 27 लाख का खेल

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ऊर्जा निगम का एमईएस बाबूगढ़ के एस्टीमेट में 27 लाख का खेल
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हापुड़। भारतीय रक्षा प्रणाली (एमईएस) बाबूगढ़ को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने की एवज में ऊर्जा निगम के अफसरों ने एस्टीमेट में खेल कर करीब 27 लाख का चूना लगा दिया। निगम की कोस्ट बुक में दर्ज सामान की दरों से कहीं अधिक दरें एस्टीमेट में जोड़ी गई। एक ही दिन में एक ही पत्रांक पर दो एस्टीमेट तैयार किए गए, अब मामला खुला तो अफसर गर्दन बचाने में लग गए हैं।
एमईएस को बिजली आपूर्ति बाबूगढ़ बिजलीघर से दी जाती है, यहां ओवर हेड लाइन होने के कारण आए दिन फाल्ट होते थे। निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर तक अंडरग्राउंड केबल डालकर लाइन बनवाने को एमईएस की ओर से आवेदन किया गया।
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इस आवेदन पर निगम की ओर से 1 करोड़ 61 लाख 81 हजार 368 का एस्टीमेट बनाया। भारतीय रक्षा प्रणाली द्वारा दो रसीदों के जरिए यह पूरा पैसा जमा कर दिया गया। लेकिन इस एस्टीमेट में अनियमितता बरती गई, इस पर सवाल उठे तो चोरी छिपे दूसरा एस्टीमेट उसी दिनांक का तैयार किया गया। लेकिन इसमें भी निगम अफसर बड़ी चूक कर गए।
पहले एस्टीमेट में जिस कोस्ट डाटा से उन्होंने डबल पोल की कीमत खुद ही 63230 रुपये दिखाई थी, दूसरे एस्टीमेट में उसी पोल की कीमत 71061 कर दी गई। यह कारनामा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि सड़क खोदाई की दूरी जो पहले एस्टीमेट में 3192 मीटर ली गई थी। बात पकड़ में आने पर उसे घटाकर आधा करना पड़ा। ऐसे में करीब 9 लाख रुपये का अंतर बन गया।
इससे भी बड़ा खेल यह हुआ कि ऊर्जा निगम की कोस्ट बुक में 11केवी की लाइन बनाने के लिए एचडीपीई पाइप की प्रति मीटर दर 490.83 रुपये है, जबकि एस्टीमेट में इसकी करीब तीन गुना 1091 रुपये/मीटर की दर ली गई। यह दर 33 केवी लाइन को बनाने में ली जानी थी। इसमें भी करीब 18 लाख रुपये का खेल हुआ।
एक ही पत्रांक पर बना दिए दो एस्टीमेट
एमईएस को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए 29 सितंबर 2020 में पहला एस्टीमेट बनाया गया, जो 1 करोड़ 61 लाख 81 हजार 368 रुपये का था। जबकि दूसरा एस्टीमेट 1 करोड़ 61 लाख 81 हजार 350 रुपये का बनाया गया। दोनों में अंतर सिर्फ 18 रुपये का था, इसमें पहले एस्टमेट का पैसा ही जमा कराया गया। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही एस्टीमेट एक ही पत्रांक के हैं।
धनराशि जमा कराने के बाद बनाया दूसरा एस्टीमेट
पहला एस्टीमेट बनाकर एमईएस को टीसी जारी कर दी गई। इसके सापेक्ष ही पैसा जमा कराया गया। हालांकि बाद में अनियमितता सामने आने पर एमईएस को बिना सूचना दिए ही उतनी ही राशि का दूसरा एस्टीमेट बनाया गया। एक ही राशि के एस्टीमेट बनाने के लिए कोस्ट बुक के नियमों की अनदेखी की गई।
पहले एस्टीमेट में सड़क खोदाई और मरम्मत की दूरी 3192 मीटर दिखाई
पहले एस्टीमेट में केबिल दबाने के लिए सड़क खोदाई और मरम्मत की दूरी 3192 मीटर दिखाई गई, जिसके अनुसार पैसा भी जमा कराया। लेकिन दूसरे एस्टीमेट में यह दूरी घटाकर 1510 मीटर कर दी गई।
घपले को उजागर करने वाले मुख्य बिंदू
* पहले एस्टीमेट में डबल पोल के एक जोड़े की कीमत 63230 दिखाई, दूसरे एस्टीमेट में इसी पोल की कीमत 71061 रुपये दर्शा दी गई।
* पहले सिर्फ 6 डबल पोल से काम चल रहा था, दूसरे एस्टीमेट में सात पोल कर दिए गए।
* 11केवी की लाइन में 33केवी लाइन के एचडीपीई पाइप की कोस्ट जोड़ी, इससे करीब 18 लाख का अंतर बना।
मेल के जरिए की शिकायत
भारतीय रक्षा प्रणाली से मामला जुड़ा होना का हवाला देते हुए ई-मेल पर पूरे साक्ष्यों के साथ एक व्यक्ति ने शिकायत की है। ऊर्जा मंत्री से लेकर चीफ, एमडी, अधीक्षण अभियंता तक को मामले से अवगत कराया गया है। इस प्रकरण ने निगम के अफसरों में हलचल बढ़ा दी है।
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एस्टीमेट का होगा सत्यापन
एस्टीमेट में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है, काम पूरा होने पर एग्जीक्यूटिड एस्टीमेट बनाया जाएगा। इस दौरान यदि अधिक सामान लगा तो अतिरिक्त पैसे चार्ज किए जाएंगे और यदि एस्टीमेट में जमा किए पैसे बचे तो वापस किए जाएंगे। - मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता।
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