दूसरे चरण के चुनाव में गईं 83 रोडवेज बसें, यात्री हुए बे-बस
हापुड़। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण का मतदान कराने के बाद हापुड़ रोडवेज की 83 बसें पुलिस फोर्स लेकर दूसरे चरण के मतदान में चली गई हैं। इसके चलते सभी रूटों पर बसों की किल्लत हो गई है। ऐसे में यात्रियों की मुसीबत बढ़ गई है और उन्हें बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
चुनाव आयोग ने अर्द्ध सैनिक बलों को मतदान वाले जनपदों में लाने ले जाने के लिए रोडवेज बसों को लगाया है। इसके लिए हापुड़ रोडवेज की 83 बसों को अधिग्रहीत किया गया है। प्रथम चरण के मतदान के लिए रोडवेज की करीब 20 बसों को पोलिंग पार्टियों को ले जाने के लिए लगाया गया था। क्षेत्र की 105 बसों में से 20 बसें लगने से दो रूट बस विहीन हो गए थे।
मतदान के बाद बसें लौट आईं लेकिन, निगम की 83 बसें दूसरे चरण के मतदान के लिए रवाना हो गईं। अब निगम के पास मात्र 22 बसें ही बची हैं। इनमें से करीब दो बसें मरम्मत के चलते सड़कों पर नहीं हैं। रूटों पर बसों की कमी से शनिवार को दिल्ली, गाजियाबाद, मोदीनगर, नोएडा रूटों पर जाने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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गाजियाबाद रूट पर ही चल रहीं 15 बसें
नगर से प्रतिदिन नौकरीपेशा करने के लिए हजारों लोग दिल्ली गाजियाबाद रूट पर जाते हैं। सबसे अधिक लोड इस रूट पर होने के कारण 55 से 60 बसें चलती थीं। लेकिन, अब निगम के पास मात्र 22 बसें ही चल रही हैं इनमें से 15 बसों को इस रूट पर चलाया जा रहा है। लेकिन, इतनी बसें इस रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए पर्याप्त नही हैं।
निगम को हो रहा लाखों रुपये का नुकसान
रोडवेज बसों के संचालन से निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन, बड़ी संख्या में बसों को चुनाव ड्यूटी के लिए अधिग्रहण कर लिया गया है ऐसे में निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
डग्गामारों की कट रही चांदी
रूटों पर रोडवेज बसों की कमी के चलते डग्गामार वाहन संचालकों चांदी काट रहे हैं। वह यात्रियों से मनमाफिक सफर का किराए की मांग कर रहे हैं। ऐसे में मजबूरन लोगों को डग्गामार वाहनों में यात्रा करनी पड़ रही है। डग्गामार वाहन के खड़े होते ही उनमें भीड़ जमा हो रही है।
बसों के बढ़ाए गए हैं फेरे
चुनाव में बसों के अधिग्रहण होने के चलते यात्रियों को परेशानियों का तो सामना करना ही पड़ रहा है। लेकिन, यात्रियों की सुविधान के लिए बसों के फेर को बढ़ाया गया है। जिससे अधिक से अधिक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचा जा सके। - संदीप नायक, एआरएम