स्वर कोकिला के निधन से संगीत प्रेमी, साहित्यकार गमगीन
हापुड़। स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन से हापुड़ के संगीत प्रेमी और साहित्यकार भी गमगीन हैं। कई दशकों तक अपनी आवाज के जादू से देशवासियों के दिलों पर राज करने वाली भारत रत्न लता मंगेशकर के जाने से देश को अपूर्णीय क्षति हुई है। संगीत प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। संगीतप्रेमियों ने कहा कि लता मंगेशकर देश की ताज थीं, उनका पूरा जीवन संगीत को समर्पित रहा। उनके निधन से भारतीय कला संस्कृति की गौरव के एक युग का अंत हो गया। डीआईओएस कार्यालय में नियुक्त जुहेब खान ने लता मंगेशकर की छह फीट ऊंची पेंटिंग तैयार कर श्रद्धांजलि अर्पित की। जुहेब ने कहा कि लता मंगेशकर ने गायन में देश को सर्वोच्च स्थान पर पहुंचाया है, उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत के विकास में लगा दिया। युवा पीढ़ी को उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए।
हर भाषा, राग में गीत गायन से जीता दिल
गीतकार अरूण मोहन शंखधर का कहना है कि लय, सुर, ताल, प्रस्तुतिकरण, गायन में सरस्वती देवी की साक्षात प्रतिमूर्ति और ऐसी शख्सियत जिसने अपनी पूरी जिंदगी संगीत को समर्पित की। उनके निधन से देश को अपूर्णीय क्षति हुई है। लगा मंगेशकर ने हर भाषा, हर राग में गीत गायन से सभी का दिल जीत लिया, न जाने कितने गीतकार उनसे प्रेरणा लेकर ही आगे बढ़े हैं।
बेहद खुशदिल थीं लता
फसीह चौधरी का कहना है कि सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन का मेंबर होने और कई सीरियल में काम करने के सिलसिले में अक्सर मुंबई जाना लगा रहता था, कई बार लता मंगेशकर से मिलना हुआ। बेहद खुशदिल और व्यवहारकुशल आचरण से हर व्यक्ति उनका मुरीद हो जाता था। उनके जाने से देश को अपूर्णीय क्षति हुई है।
भारतीय कला संस्कृति की गौरव के एक युग का हुआ अंत
गायिका डॉ जया शर्मा का कहना है कि स्वर कोकिला संगीत साम्राज्ञी विद्वषी लता मंगेशकर जी वसंत ऋतु में मां सरस्वती की आराधना करते संगीत संस्कार से महाप्रयाण कर स्वर्ग लोक चली गई। भारतीय कला संस्कृति की गौरव के एक युग का अंत हो गया। सरस्वती मां की आवाज अपनी पुण्य काया को त्यागकर परम सत्ता के धाम चली गईं।
थम गया स्वर साम्राज्ञी के सुरों का संगम
वरिष्ठ कवि डॉ अनिल बाजपेई का कहना है कि एक पल को विश्वास नहीं होता कि स्वर साम्राज्ञी के सुरों का संगम थम गया है। उनके अवसान की खबर से लगा कि जैसे हवा का प्रवाह रुक गया हो, वक्त मानो थम गया हो एक आवाज जो दिल के तारों को झंकृत कर जाती थी ये जादुई आवाज मीरा के सितार की तरह थे जिसे सुनकर लोग अपने गम, दुख एवं संघर्षों के थपेड़ों को भूल जाते थे।