टोल प्लाजा पर ओवैसी की गाड़ी धीमी होते ही चला दी गोली
पिलखुवा। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हैद्राबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर हमले के लिए पूरी तैयारी की गई थी। दोनों हमलावर युवक पहले से तैयार खड़े थे। ओवैसी का काफिला जैसे ही टोल प्लाजा पहुंचा, वे नजदीक आ गए। जैसे ही गाड़ियों की रफ्तार धीमी हुई, वैसे ही ओवैसी की कार पर गोली चला दी। फुटेज में नजर आ रहा है कि दोनों ने गोली कार के नीचे की तरफ ही चलाई। वे हमले के लिए ओवैसी के आने से डेढ़ घंटा पहले पहुंचे थे।
पिलखुवा थाना में घटना की रिपोर्ट ओवैसी के ड्राइवर यामीन ने दर्ज कराई गई। इसमें बताया गया कि वे लोग मेरठ से दिल्ली जा रहे थे। कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने अज्ञात में जानलेवा हमले का केस दर्ज किया। हमलावरों में से सचिन को मौके से पकड़ा गया जबकि शुभम की गिरफ्तारी गाजियाबाद से सिंहानी गेट से बताई जा रही है। दोनों ने पूछताछ में कई बार अपने नाम बदले। बाद में सचिन और शुभम बताए। मौके पर पहुंचे मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि पुलिस की टीमें इनके बताए हुए घर के पते पर भेजी गई हैं। नाम और पता तसदीक किया जा रहा है। हो सकता है कि ये झूठ बोल रहे हों। उधर, यामीन ने बताया कि दोनों हमलावरों ने गोलियां चलाई। काफिले की दूसरी कार में मौजूद बाबा ने बताया कि उन्होंने ही हमलावर को पकड़ा।
पहले लगा धमाका हुआ, फिर समझे फायरिंग
ओवैसी ने घटनास्थल से जाने के बाद एएसपी को फोन किया। उन्हें पूरा घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि वह पहले समझे कि आस पास कोई धमाका हुआ। दूसरी गोली चलने पर अहसास हुआ कि फायरिंग हो रही है। निशाना उनकी कार ही थी। इसके बाद ओवैसी ने घटना के बारे में ट्वीट किया।
चार गोलियां चलीं, तीन के निशान मिले
देर शाम पहुंची फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने जांच पड़ताल के बाद पुलिस को जानकारी दी। इसमें बताया कि कुल चार गोलियां चलाई गईं। जिस कार में ओवैसी थे, उस पर गोली लगने के तीन निशान मिले हैं। इनमें दो टायरों के पास हैं।
हमलावर को कार से मारी टक्कर
हमलावरों में से एक ने सफेद शर्ट पहन रखी थी। दूसरे ने हुड वाली जैकेट जो लाल रंग की थी। जैकेट वाला हमलावर भागा नहीं था। ओवैसी के आगे चल रही कार के ड्राइवर ने उसे देखा तो टक्कर मार दी। इससे वह गिर पड़ा। इसके बाद उसे पकड़ा गया। उसके हाथ में पिस्तौल थी। इसे छीन लिया गया।
हम किसी दल के कार्यकर्ता नहीं
पुलिस की पूछताछ में सचिन और शुभम ने बताया कि वे किसी दल के कार्यकर्ता नहीं हैं। असदुद्दीन ओवैसी से ज्यादा नाराजगी उनके भाई अकबरुद्दीन से है। काफी दिन से हमला करने की सोच रहे थे। उनका इरादा ओवैसी की जान लेने का नहीं, बल्कि यह संदेश देना था कि नफरत की राजनीति छोड़ दें। ओवैसी को नुकसान न हो, इसलिए गोली कार के निचले हिस्से में चलाई थी।
चार गाड़ियों के काफिले में थे ओवैसी
ओवैसी मेरठ से चार गाड़ियों के काफिले में निकले थे। दो उनके पीछे थीं। एक आगे। वह कार में आगे वाली (ड्राइवर के बराबर में) सीट पर बैठे थे। इसी कार में उनकी पार्टी के यूपी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली थे। हमलावरों ने इसी कार को निशाना बनाकर गोली चलाई।
समर्थकों का गुस्सा फूटा
ओवैसी पर हमले की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर सवालों की बौछार कर दी। उनका कहना था कि पास में ही पुलिस चौकी है, फिर हमला कैसे हो गया? आखिर एक हमलावर कैसे भाग निकला, उसे पकड़ा क्यों नहीं गया।
चुनाव के समय ही क्यों किया हमला
1. पुलिस कई सवालों के जवाब ढूंढ रही है। सबसे अहम यह है कि हमलावरों को कैसे पता चला कि ओवैसी टोल प्लाजा से होकर गुजरेंगे?
2. हमलावरों ने पूछताछ में यह भी नहीं बताया कि उन्हें ओवैसी के टोल प्लाजा पर पहुंचने के समय की जानकारी किससे मिली?
3. साजिश से भी पर्दा नहीं उठा है, पुलिस यह भी पूछ रही है कि उनके पास हमले के लिए पिस्तौल कहां से आईं?
4. सवाल हमले की टाइमिंग पर भी उठ रहा है, आखिर यह विधानसभा चुनाव के समय ही क्यों किया गया?
5. दोनों हमलावरों का आपस में लिंक भी पुलिस तलाश रही है, सवाल ये भी है कि उन्होंने शुरू में अपना नाम-पता गलत क्यों बताया?