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बाबूगढ़ में आठ करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला आलू उत्कृष्टता केंद्र

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बाबूगढ़ में आठ करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला आलू उत्कृष्टता केंद्र
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हापुड़। बाबूगढ़ के आलू अनुसंधान केंद्र में जल्द ही प्रदेश का पहला आलू उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर पोटेटो) स्थापित होगा। इसमें टीशू कल्चर विधि से आलू की विशेष प्रजातियों का बीज तैयार किया जाएगा। आठ करोड़ की लागत से आधुनिक लैब बनेगी। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। इस सुविधा से जिले में आलू के बीज की कोई कमी नहीं रहेगी।
जिले में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। उद्यान विभाग में सीमित बीज ही आता है, इसमें अधिक डिमांड वाली प्रजाति का बीज काफी कम होता है। जिसके चलते किसानों को दूसरे जिलों पर ही निर्भर रहना पड़ता है, या फिर निजी प्रतिष्ठानों से महंगा और खराब गुणवत्ता का बीज खरीदना पड़ता है।
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किसानों की इस समस्या का निदान अब जल्द ही हो जाएगा। बाबूगढ़ स्थित आलू अनुसंधान केंद्र में आलू उत्कृष्टता केंद्र खोले जाने की अनुमति मिल गई है। स्थानीय अधिकारियों ने शासन के आदेश पर इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत आठ करोड़ रुपये बताई गई है।
आलू उत्कृष्टता केंद्र का समझौता सीपीआरआई (केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान) से होगा। सीपीआरआई से जी-शून्य जनरेशन का ब्रिड लिया जाएगा। इसे विकसित कर जी-3 जनरेशन पर ले जाकर, फाउंडेशन बीज तैयार कराया जाएगा।
आलू उत्कृष्टता केंद्र पर बनी टीशू लैब में बेहद डिमांड वाले आलू की प्रजातियों का 15 ग्राम का ब्रिड लाया जाएगा। ट्यूबर विधि से इसका टीशू लेकर ट्रांसप्लांट कराया जाएगा। इसके बाद इसे जी-शून्य, जी-1, जी-2 स्टेप से निकालते हुए जी-3 स्तर पर ले जाया जाएगा। यहां से बीज को फाउंडेशन की श्रेणी में शामिल कर, किसानों को मुहैया कराया जाएगा।
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सांख्यिकी अधिकारी = आलू उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर पोटेटो) की स्थापना के लिए शासन में प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जल्द ही इसका कार्य शुरू हो जाएगा। आलू की आधुनिकतम प्रजातियों का बीज यहां तैयार हो सकेगा।
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