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हापुड़ में व्हाइट फंगस से पहली मौत, तीन ने ब्लैक फंगस से तोड़ा दम

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हापुड़ में व्हाइट फंगस से पहली मौत, तीन ने ब्लैक फंगस से तोड़ा दम
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हापुड़। जिले में व्हाइट फंगस से पहली मौत की पुष्टि हुई है। मरीज की मौत के बाद दिल्ली के अस्पताल में दस्तावेजों की जांच पर स्वास्थ्य विभाग ने यह दावा किया है। अब तक फंगल इंफेक्शन की चपेट में आकर 4 लोगों की मौत चुकी है। जबकि 6 मरीजों का उपचार चल रहा है। जिनमें तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। कोरोना से उबरे लोगों पर इस बीमारी का अधिक प्रकोप दिख रहा है।
कोरोना संक्रमितों की संख्या में अब भले ही कमी आ रही हो लेकिन इस महामारी से ठीक हो रहे मरीजों में फंगल इंफेक्शन के मामले सामने आ रहे हैं। जिले में ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस का भी मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक 10 मरीज फंगल इंफेक्शन से संक्रमित हो चुके हैं। इन मरीजों में तीन की मौत ब्लैक फंगस से हुई है। हाल ही में एक और मरीज की मौत हुई है। जिसके परिजनों ने व्हाइट फंगस होने का दावा किया था। इसकी सच्चाई जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दिल्ली के अस्पताल में जाकर दस्तावेजों की जांच की। जांच में मृतक की मौत का कारण व्हाइट फंगस ही माना गया है। जिले में व्हाइट फंगस से यह पहली मौत हैं, जबकि इससे पहले तीन मौत ब्लैक फंगस से हुई हैं। 6 मरीजों का वर्तमान में उपचार चल रहा है, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। कोरोना से उबरे मरीजों पर इन बीमारियों का अधिक खतरा है। कुल मरीजों में से सिर्फ एक मरीज ही नॉन कोविड है, बाकी मरीज कोरोना संक्रमण के बाद फंगल इंफेक्शन की चपेट में आए हैं।
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-कोरोना से ठीक होने के बाद दिख रहा असर
कोरोना से ठीक हुए लोगों पर फंगल इंफेक्शन का खतरा मंडरा रहा है। अब तक 10 मरीजों में 9 ऐसे लोग हैं, जो कोरोना से हाल ही में उबरे हैं। इनमें से तीन लोगों की मौत भी हुई है, सिर्फ एक मौत नॉन कोविड मरीज की हुई है।
ब्लैक और व्हाइट फंगस में अंतर
चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस कोरोना के उन मरीजों में पाया गया है जिनको बहुत ज्यादा स्टेरॉयड दिए गए, जबकि व्हाइट फंगस के केस उन मरीजों में संभव हैं जिन्हें कोरोना नहीं हुआ। ब्लैक फंगस आंख और ब्रेन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है जबकि व्हाइट फंगस आसानी से लंग्स, किडनी, आंत, पेट और नाखूनों को प्रभावित करता है। ब्लैक फंगस नाक से शरीर में आता है लेकिन व्हाइट फंगस अगर एक बार खून में आ जाए तो वो खून के जरिए ब्रेन, हार्ट, किडनी, हड्डियों समेत सभी अंगों में फैल सकता है। इसलिए ये काफी खतरनाक फंगस माना जाता है।
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संक्रमितों में लक्षण
* मरीज की नाक से कफ जैसा तरल पदार्थ निकलता है।
* आंख, नाक के पास ललिमा के साथ दर्द होता है।
* मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
* खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द होता है।
* मरीज को चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है।
* दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होने लगती है।
* कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है।
* मरीजों को सीने में दर्द होता है।
इन रोगियों में ज्यादा असर-
* जिनका शुगर लेवल हमेशा ज्यादा रहता है।
* जिन रोगियों ने कोविड के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड लिया हो।
* काफी देर आईसीयू में रहे लोग।
* ट्रांसप्लांट या कैंसर के रोगी।
अधिकारी कहिन-
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ रेखा शर्मा ने बताया कि व्हाइट फंगस से एक मौत हुई है। अब तक चार मौत फंगल इंफेक्शन से हो चुकी हैं। जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए ओपीडी शुरू करा दी गई है।
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