ब्लैक फंगस से हुई तीसरी मौत, चार मरीजों का चल रहा उपचार
हापुड़। जिले में ब्लैक फंगस से तीसरी मौत हो गई है, जबकि चार मरीजों का अभी भी उपचार चल रहा है। कोरोना से उबरने के बाद मृतक फंगल इंफेक्शन की चपेट में आया था। जिसका उपचार मेरठ के एक अस्पताल में चल रहा था। फंगल इंफेक्शन से मरने वालों की दर 42 फीसदी से अधिक है। हालांकि हापुड़ में हाल ही में एक मरीज इस बीमारी को मात देकर लौटा है। कुल सातों मरीजों में सिर्फ एक नॉन कोविड मरीज थी, बाकि सभी कोरोना से भी संक्रमित हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों को ठीक करने के लिए दी जाने वाली स्टेरॉयड और ऑक्सीजन ने मरीजों की हालत बिगाड़ दी है। कोरोना के संक्रमण से उबरने के बाद अधिकांश मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है। जिसके चलते ऐसे मरीजों को ब्लैक फंगस अपनी चपेट में ले रहा है।
अब तक तीन की मौत
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड की बात करें तो जिले में अब तक सात ब्लैक फंगस के मरीज मिले हैं। इनमें सिर्फ एक मरीज नॉन कोविड थी, बाकी सभी 6 कोरोना से संक्रमित मरीज ही हैं। इन सात मरीजों में से अब तक तीन की मौत हो गई है। शुक्रवार को हापुड़ निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति ने मेरठ में उपचार के दौरान दम तोड़ा है। इसके अलावा कई अन्य मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इसका उपचार पा रहे हैं, जिनका रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ऐसा ही एक मरीज हाल ही में ब्लैक फंगस से स्वस्थ होकर लौटा है।
42 फीसदी से अधिक है ब्लैक फंगस से मृत्यु दर-
कोरोना महामारी में जहां मृत्यु दर महज डेढ़ प्रतिशत के आस पास है, वहीं ब्लैक फंगस होने पर जान जाने का जोखिम 42 फीसदी से अधिक है। यही कारण है कि हापुड़ के सात मरीजों में से अब तक तीन की मौत हो चुकी है, जबकि चार की हालत भी पूरी तरह ठीक नहीं है।
जिला अस्पताल में रोजाना जांच को पहुंच रहे लोग
जिला अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों की पहचान के लिए ओपीडी शुरू की गई है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ परमेंद्र वर्मा ने बताया कि अस्पताल में रोजाना दस से अधिक लोग जांच को पहुंच रहे हैं, इनमें अधिकांश वह लोग हैं जो हाल ही में कोरोना से उबरे है। अभी तक की जांच में सिर्फ एक संदिग्ध मिला है, बाकी सभी स्वस्थ हैं।
संक्रमितों में लक्षण-
* मरीज की नाक से काला कफ जैसा तरल पदार्थ निकलता है।
* आंख, नाक के पास ललिमा के साथ दर्द होता है।
* मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
* खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द होता है।
* मरीज को चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है।
* दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होने लगती है।
* कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है।
* मरीजों को सीने में दर्द होता है।
इन पर ज्यादा असर-
* जिनका शुगर लेवल हमेशा ज्यादा रहता है।
* जिन रोगियों ने कोविड के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड लिया हो।
* काफी देर आईसीयू में रहे लोग।
* ट्रांसप्लांट या कैंसर के रोगी।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ रेखा शर्मा ने बताया कि जिले में ब्लैक फंगस से अभी तक तीन मौत हो चुकी हैं। कुल सात मरीज रिकॉर्ड में हैं, इनमें से चार का उपचार चल रहा है।