बेड मिला पर ऑक्सीजन नहीं, तड़पते रहे मरीज
हापुड़। कोरोना से लोगों की सांसें उखड़ रही हैं। हालत बिगड़ने पर गंभीर रोगी जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां बेड तो मिल रहे हैं लेकिन आक्सीजन व वेंटीलेंटर की व्यवस्था नहीं है। मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मानों जंग लड़नी पड़ रही है। काफी मिन्नत के बाद मरीज भर्ती तो किए जा रहे हैं। लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं है।
कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में बदहाल व्यवस्था के चलते दहलीज पर ही मरीजों की सांसे उखड़ रही है। कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए की गई व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं और मरीज तड़पने को मजबूर हैं। शुक्रवार को ही एक मरीज ने इलाज न मिलने पर अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ दिया था। शनिवार को भी यही स्थिति देखी गई। वहीं रविवार को तो और भी बुरी स्थिति रही। हाल यह है कि मरीजों को देखने वाला कोई नहीं है। भले ही शासन मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने का दावा कर रहा है। संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कह रहा हो लेकिन जिला अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्थाओं पर स्थानीय प्रशासन व शासन आंखें मूंदे बैठा है। रविवार को अस्पताल में इलाज के लिए आए चार मरीजों के उदाहरण यहां की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं।
सीएमओ डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सके, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी प्रकार से लोगों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
तगासराय निवासी मुन्नालाल की सांसे उखड़ रही थी। उन्हें आक्सीजन की बेहद आवश्यकता थी। एंबुलेंस की त्वरित व्यवस्था नहीं हो सकी तो परिजन निजी कार से उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। मरीज की हालत गंभीर थी और भर्ती कराने के लिए उसे यहां लाया गया था। काफी मिन्नत करने के बाद बेड मिला।
सूर्य विहार निवासी सोनू शर्मा की तबीयत पिछले तीन दिन से खराब थी। रविवार को अचानक तबीयत खराब हो गई। निजी एंबुलेंस में लेकर पत्नी राधा उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंची तो एंबुलेंस में लगी आक्सीजन भी खत्म हो गई। मरीज एंबुलेंस में ही तड़प रहा था और उसे देखने वाला कोई नहीं था।
गढ़ निवासी नीतू को भी कुछ दिन से बुखार की स्थिति थी। रविवार को अचानक बुखार बढने पर उन्हें सांस लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। परिजनों ने चिकित्सकों व स्टाफ से मरीज को भर्ती करने के लिए काफी मिन्नत कीं, तब जाकर मरीज को बेड मिला।