हैंडपंप खराब, सार्वजनिक शौचालयों में लटके हैं ताले
हापुड़। बाबूगढ़ में जन सुविधाओं का अभाव है। करीब-करीब सभी सार्वजनिक शौचालयों पर ताले पड़े हुए हैं और लोगों को पीने का पानी भी मयस्सर नहीं हो रहा है। जगह-जगह नाले भी चौक पड़े हुए हैं और रास्तों पर भी जलभराव हो रहा है। बजट होने के बावजूद नगर पंचायत के उदासीन रवैये के प्रति लोगों में तो रोष पनप ही रहा है, इस स्थिति में सभासद भी लामबंद हो रहे हैं।
बाबूगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र के दस वार्ड हैं। हाईवे 09 पर बसे होने के कारण इसकी महत्ता अधिक हो जाती है। लेकिन नगर पंचायत क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव है। वार्डों की स्थिति तो ऐसी है ही। हाईवे के आसपास के क्षेत्र के निरीक्षण में हालात काफी बदतर दिखे। बाबूगढ़ में हाईवे पर सात हैंडपंप लगे हुए हैं, जिनमें छह खराब हैं। चार वाटर कूलर में तीन काम नहीं रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबूगढ़ से यदि आप गुजर रहे हैं तो आपको दुकानों से खरीदकर ही बोतल का पानी पीना पड़ेगा। पानी के लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
जनसुविधाओं की बात करें तो यहां सार्वजनिक और पिंक शौचालयों पर भी ताले लटके रहते हैं। बाबूगढ़ में चार सार्वजनिक शौचालय हैं। इनके ताले तभी खुलते हैं, जब लखनऊ से कोई टीम जांच के लिए पहुंचती है। यहां नालों की स्थिति भी बेहद दयनीय है। गंदगी से नाले अटे पड़े हैं और इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बछलौता रोड पर जलभराव की स्थिति भी इसी के कारण है। लोगों में इस बात को लेकर रोष व्याप्त है।
नगर पंचायत अध्यक्ष और ईओ की रार बनी मुसीबत
ऐसा नहीं है कि नगर पंचायत के पास उसका बजट नहीं है। लगभग हर मद में पंचायत के खाते में धनराशि है। लेकिन इसके बावजूद कार्य नहीं हो रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष जगबीर सिंह का कहना है कि कस्बे की समस्याओं को लेकर लगातार ईओ को पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन कार्य नहीं हो रहे हैं। हालांकि वे अपने स्तर से कार्य कराने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। ईओ नमिता चौधरी का कहना है कि समस्याओं के समाधान के लिए वे लगातार निरीक्षण कर रही हैं। अधिकतर सुविधाएं दुुरुस्त हैं। नालों की सफाई के साथ दूसरी समस्याओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।
सभासद मीनू चौधरी का कहना है कि कस्बे में समस्याओं का अंबार है। लगभग हर वार्ड में गंदगी अटी पड़ी है और लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सभासद अनीस का कहना है कि कस्बे के लोगों को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा है। वाटरकूलर खराब पड़े हुए हैं, लेकिन इस ओर अध्यक्ष या ईओ किसी के द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सभासद आदर्श शर्मा का कहना है कि सरकार ने सार्वजनिक शौचालयों और पिंक शौचालयों के निर्माण पर लाखों रुपये का खर्च किया गया है। लेकिन जब से ये बने हैं, कस्बे में इनके ताले पड़े हुए हैं। ऐसे में खासकर महिलाओं को परेशानी होती है।