कोरोना काल में शादी के दौरान सीमित संख्या में मौजूद रहे लोग.
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लॉकडाउन में जिंदगी : पाबंदियों के बीच एक दूसरे के हुए करीब पांच हजार जोड़े
हापुड़। लॉकडाउन के दौरान जहां सड़कों पर लोगों के निकलने पर मनाही थी, वहीं पाबंदियों के बीच अनुमति के बाद लोगों को एक सीमित संख्या में शादियों के भी आयोजन हुए। जिले में इस दौरान करीब पांच हजार शादियां संपन्न हुईं। सीमित संख्या में शादियां होने से इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ।
लॉकडाउन के बाद करीब दो माह तक शादी समारोह जैसे मांगलिक कार्याें पर भी ब्रेक लग गया। लोगों को शादी समारोहों की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। लेकिन जिन लोगों के लिए तारीख आगे बढ़ाना संभव नहीं था। उन्होंने जिला प्रशासन से अनुमति लेकर विवाह कार्यक्रम किए। शादी समारोह में दूल्हे के साथ चार लोगों को जाने की अनुमति थी। इस दौरान जून-जुलाई में करीब सैकड़ों शादियां बिन बराती और बिना बैंड बाजे के सादगी के साथ हुईं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार करीब पांच हजार जोड़े इस दौरान एक दूसरे के हुए। इस दौरान नियमों का पूरी तरह से पालन कराया गया। सादगी के साथ की गई इन शादियों ने फिजूलखर्ची पर रोक लगाने का संदेश दिया।
कोरोना माहामारी काल में हापुड़ के मैरिज होम, डेकोरेशन व लाइट, बैंड बाजा, फूल वाला, किराना उद्योग, डेयरी उद्योग आदि शादी समारोह से जुड़ा व्यापारी वर्ग बुरी तरह से प्रभावित रहा। इन सभी लोगों के कार्य पूरी तरह से ठप्प हो गया था।