पर्यावरण संरक्षण के लिए पूठ में बनेगा जैव विविधता पार्क
हापुड़। पौधों के संरक्षण और रिसर्च के लिए गंगा किनारे पूठ में जैव विविधता (बॉयोडायवर्सिटी) पार्क बनने की कवायद तेज हो गई है। नीति आयोग उपाध्यक्ष के निजी सचिव रविंद्र कुमार ने प्रशासन से योजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। पार्क के बनने से विलुप्त और दुर्लभ वनस्पतियों का संरक्षण होगा वहीं संग्रहालय भी तैयार किया जाएगा।
देश के पहले गंगा ग्राम पूठ के विकास की योजनाएं तेजी से रफ्तार पकड़ने लगी हैं। नीति आयोग ने योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। सरकार की योजना में पूठ में जैव विविधता पार्क बनाने की भी योजना है। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के पौैधे लगाए जाएंगे। वहीं विलुप्त और दुर्लभ ुप्रजाति के पौधों का भी संरक्षण किया जाएगा। इससे छात्रों और प्रकृ ति प्रेमियों को शोद कार्य करने में काफी लाभ मिलेगा।
वन विभाग की तरफ से गंगा ग्राम पूठ में जैव विविधता पार्क बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत अभी धनराशि मिलनी है। जिसके बाद ही इसका निर्माण शुरू होगा। योजना की प्रगति जानने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष के निजी सचिव रविंद्र कुमार ने जैव विविधता पार्क की प्रगति को लेकर प्रशासन को पत्र भेजा है।
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फ्लोरा-फौना का होगा सरंक्षण
हापुड़ में गंगा किनारे बॉयोडायवर्सिटी पार्क बनने से फ्लोरा (वनस्पति) और फौना (पशु-पक्षी) का भी संरक्षण हो सकेगा। इससे कंक्रीट विकास से विलुप्त होने के कगार पर पहुंची फ्लोरा-फौना की कई प्रजातियों का भी संरक्षण होगा। अफसरों की मानें तो जैव विविधिता पार्क को विजिटर्स जोन और नेचर कंजरवेशन में अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा। विजिटर्स जोन में नर्सरी, सेक्रेड ग्रोव, नक्षत्र वाटिका, पंचवटी, नवग्रह वाटिका, रीक्रियेशनल पार्क, बर्डिंग एरिया, रोकरी गार्डेन, नेचर इंटरप्रीटेशन सेंटर, नेचर ट्रायल्स, वाटर बॉडीज, हर्बल गार्डेन आदि स्पॉट होंगे। नक्षत्र वाटिका और पंचवटी वाटिका में नीम, बेल, बरगद, आंवला, पीपल, तुलसी और अशोक के पेड़ होंगे। अधिकारियों का दावा है कि जैव विविधता पार्क बन जाने से जिले में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा।
हापुड़ वन विभाग के अपर सांख्यिकी अधिकारी ममित राना ने बताया कि शासन से धनराशि मिलने पर जल्द ही गंगा ग्राम पूठ में जैव विविधता पार्क का निर्माण शुरू हो सकेगा। गंगा किनारे पार्क बनने और खसखस के पौधे लगने से गंगा कटान को रोकने में भी मदद मिलेगी। हापुड़ की पर्यटन के क्षेत्र में भी अलग पहचान बन सकेगी।