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काली नदी को बचाने के लिए ततारपुर क्षेत्र में बनेगा एसटीपी

Fri, 05 Feb 2021 11:42 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
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जल निगम हापुड़ शहर के बड़े नालों को काली नदी में सीधे गिरने से रोकने की कवायद कर रहा है। हापुड़ में करीब 47 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण ततारपुर सीतादेई क्षेत्र में कराया जाएगा। जल निगम ने करीब चार हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है।
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हापुड़ से गुजरने वाली काली नदी में भी शहर के नालों का गंदा पानी गिरता है। काली के माध्यम से प्रदूषण गंगा तक पहुंचता है। गंगा के भी हालात खराब हो रहे हैं। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना के तहत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की कवायद की जा रही है।

इसके तहत हापुड़ जल निगम भी प्रयास कर रहा है। एनजीटी के अनुसार शहरों से निकल रहे बड़े नालों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के बाद काली नदी तक पहुंचाना है। जल निगम ने हापुड़ के नालों का भी चयन किया है। गढ़ रोड के नालों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए ततारपुर सीतादेई क्षेत्र में एसटीपी बनाया जाएगा। प्लांट से ही नाले को जोड़ा जाएगा। यहीं पर ही नाले के गंदे पानी को ट्रीट किया जाएगा।
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चार हजार वर्ग मीटर भूमि की जरूरत
जल निगम हापुड़ ने प्रशासन को पत्र लिखा है। जिला प्रशासन हापुड़ से भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है। एसटीपी के लिए ततारपुर सीतादेई क्षेत्र में करीब चार हजार वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है। निर्धारित भूमि मिलने पर ही प्लांट का निर्माण कराया जा सकेगा। ट्रीट पानी को खेतों की सिंचाई में प्रयोग किया जा सकेगा।

एनजीटी के आदेशों का होगा पालन
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) भी गंगा व काली नदी को प्रदूषित होने से रोकने के दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। हापुड़ शहर के नालों के पानी को ट्रीट करने से काली नदी को प्रदूषित होने से भी रोका जा सकेगा। इससे धरातल पर एनजीटी के आदेशों का भी पालन हो सकेगा। काली नदी को भी निर्मल बनाया जा सकेगा।

जल निगम के अधिशासी अभियंता विनय रावत ने बताया कि हापुड़ के नालों के दूषित पानी को काली नदी में गिरने से रोकने के लिए एसटीपी का निर्माण ततारपुर सीतादेई क्षेत्र में कराया जाएगा। प्रशासन से चार हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है।
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