कुष्ठ रोगियों से न करें किनारा, दवाओं से स्वस्थ हो रहे मरीज
हापुड़। कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं है, इसलिए कुष्ठ रोगियों से सौतेला व्यवहार न करें। बल्कि उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं ताकि वह जल्द स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्य विभाग इस तरह की जागरूकता लोगों के बीच फैला रहा है। दवाओं से कुष्ठ का इलाज संभव है, जिले में बहुत से मरीज पूरी तरह स्वस्थ भी हो चुके हैं। कुष्ठ दिवस पर स्वास्थ्य कर्मियों को इसकी शपथ भी दिलाई गई।
कुष्ठ रोग एक विषाणु के जरिये फैलता है, यह छुआछूत की बीमारी नहीं है। हालांकि बहुत समय तक रोगी के संपर्क में रहने पर यह दूसरे लोगों में फैल भी सकता है। बहरहाल, अब इस रोग के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कारगर दवाएं हैं। जिनका सेवन करने के बाद मरीज के संपर्क में आने पर भी दूसरे लोगों में यह रोग नहीं फैल सकता।
स्वास्थ्य अफसरों की मानें तो कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं रहा है। बल्कि नियमित उपचार से कुछ ही महीने में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस पर शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों को अधिकारियों ने शपथ दिलाई, साथ ही मरीजों को बेहतर उपचार देने और उनकी निगरानी कर पूरी तरह स्वस्थ करने का भी प्रण लिया गया।
जिले में कुष्ठ रोगियों की स्थिति
वर्ष मरीजों की संख्या
2017-18 91
2018-19 239
2019-20 114
2020-21 30
कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण
* शरीर पर तांबयी रंग के चक्कते बन जाना।
* चक्कतों में सुनपन का एहसास होना।
* हाथ पैर की अंगुलियों में विकलांगता आ जाना।
* सोते समय कमर पर अधिक पसीना आना।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जेपी त्यागी ने बताया कि जिले में कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। दवाओं से इसका उपचार आसानी से कराया जा सकता है। लोग कुष्ठ रोगियों से दूरी न बनाएं, बल्कि उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।