जैविक विधि से बीजामृत तैयार करेंगे किसान
हापुड़। जिले के किसान अब जैविक विधि से बंपर फसल ले सकेंगे। कृषि विभाग केंद्र ने दो विधियां जैविक विधि से तैयार की हैं, जिन्हें कृषि विभाग के अधिकारियों से साझा किया गया है। अब गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को इन विधियों से अवगत कराया जाएगा। इससे न सिर्फ रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम हो जाएगा, मिट्टी की ताकत भी बढ़ जाएगी। किसान अपने घर पर ही जैविक कल्चर तैयार कर सकेंगे।
जिले में बड़े पैमाने पर खेतीबाड़ी होती है। मृदा परीक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि किसान अगर जल्ज जागरूक नहीं हुए तो यहां की भूमि बंजर भी हो सकती है। विभाग ने इस तरह की आशंका भी व्यक्त की है।
इस संकट से बचने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा बीज और रोग उपचार की युक्ति तैयार की गई है। किसान अपने घर पर ही देशी गाय के गोबर, मूत्र व देसी चीजों के साथ बीज उपचार की दवा तैयार कर सकेंगे। बीज की बुवाई से पहले इस दवा से बीज का उपचार किया
जा सकेगा। इससे खेतों में उगने वाली फसल पूरी तरह से स्वस्थ रहेगी, साथ ही इसका अंकुरण भी पहले से कहीं अधिक अच्छा रहेगा।
इसके अलावा जीवामृत भी किसान घर पर ही तैयार कर सकेंगे। इसके प्रयोग से खेतों में खड़ी फसलों भी निरोगी रहेंगी। बिना किसी खर्च के ही किसान इन दोनों युक्तियों को अपने घर तैयार कर सकेंगे। इससे न सिर्फ रसायनिक उर्वरकों का खर्च बचेगा, साथ ही मृदा का स्वास्थ्य भी बेहतर हो जाएगा।
बीजामृत तैयार करने की विधि
* देशी गाय का ताजा गोबर एक किलोग्राम, गोमूत्र एक लीटर, दूध 100 एमएल, खेत के मेड़ की मिट्टी 200 ग्राम, चूना 50 ग्राम। उपरोक्त सभी को पांच लीटर पानी में मिलाकर मटके में दो दिन तक रखते हैं। इसके बाद छानकर बुवाई के दिन बीजों का उपचार करें।
जीवामृत बनाने की विधि
देशी गाय का गोबर 10 किलोग्राम, देश गाय का गोमूत्र 10 लीटर, एक किलोग्राम गुड़, एक किलोग्राम बेसन, एक किलोग्राम मिट्टी, 200 लीटर पानी को एक प्लास्टिक के ड्रम में डालकर डंडे की सहायता से इस मिश्रण को अच्छी तरह हिलाये। जिससे यह पूरी तरह से मिक्स हो जाए। अब इस ड्रम को ढक कर छांव में रख दें। इस मिश्रण पर सीधी धूप नहीं पड़नी चाहिए। 6 से 7 दिन तक इस मिश्रण को फिर से किसी लकड़ी की सहायता से हिलाए। लगभग सात दिन के बाद जीवामृत उपयोग के लिए बनकर तैयार हो जाऐगा।
कोट
उप कृषि निदेशक वीबी सिंह का कहना है कि किसान जैविक विधि से बीज व फसल उपचार कर सकेंगे। देसी गाय के गोबर, मूत्र से ही बीज और जीवामृत तैयार किए जा सकेंगे।