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ट्यृबवैल बिलों में 220 करोड़ के घोटाले की जांच को पहुंची टीम, फाइलें की जब्त

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ट्यृबवैल बिलों में 220 करोड़ के घोटाले की जांच को पहुंची टीम, फाइलें की जब्त
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हापुड़। किसानों के निजी नलकूपों के बिजली बिलों में हेराफेरी कर 220 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले से जुड़े अहम दस्तावेजों को खंगालने के लिए गठित स्पेशल टीम तीन दिन से हापुड़ के अधिशासी अभियंता कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में डेरा डाले हुए है। सैकड़ों फाइलें जब्त की जा चुकी हैं, रात में टीम रिकॉर्ड रूम को सील कर ही यहां से जाती है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता, डायरेक्टर पूरी मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
पावर कॉरपोरेशन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों व लिपिकों ने किसानों के निजी नलकूपों के बिजली के लेजरों में हेराफेरी कर करीब 220 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया था। वर्ष 2002 में इस घोटाले की पोल खुली तो गूंज लखनऊ तक गई। लेकिन लचर और बदहाल सिस्टम के चलते करीब दो दशक बीत जाने के बाद भी इसकी परतें नहीं खुल सकी हैं। यही कारण है कि इस घोटाले के आरोपी आज भी खुले घूम रहे हैं और किसानों के बिलों में लाखों रुपये की फर्जी बकायेदारी जुड़कर आ रही है। घोटाले की जांच ईडी द्वारा भी कराई गई, लेकिन पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिलने के कारण कोई निष्कर्ष ही नहीं निकल सका।
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बीते दिनों डीएम अदिति सिंह ने शासन को पत्र भेजकर टीम बनाकर जांच की मांग की गई थी। जिसके बाद शासन स्तर से एक स्पेशल टीम का गठन किया गया था। कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते यह जांच अधर में लटक गई। लेकिन अब फिर से जांच में तेजी आ गई है। घोटाले की जांच के लिए गठित टीम बीते तीन दिन से हापुड़ के अतरपुरा बिजलीघर परिसर में बने रिकॉर्ड रूप में डेरा डाले हुए है। नलकूप बिलों से जुड़ा जितना पुराना रिकॉर्ड है उसे खंगाला जा रहा है। सैकड़ों फाइलें अब तक जब्त की जा चुकी हैं, जिनसें घपले की परतें खुलने की उम्मीद है। सतर्कता इतनी बरती जा रही है कि टीम जब रात के समय यहां से जाती है तब रिकॉर्ड रूम को सील कर दिया जाता है। नीचे दबी फाइलों को बाहर निकालने के लिए बाहर से कर्मचारियों को बुलाया हुआ है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता, डायरेक्टर खुद भी जांच के लिए यहां आते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द किसानों को इस भारी भरकम फर्जी बकायेदारी से राहत मिल जाए।
घोटाले के बाद कनेक्शन लेने वाले किसान भी झेल रहे बकायेदारी
इस घोटाले के बाद जिन किसानों ने कनेक्शन लिया था। इनमें भी बहुत से फर्जी बकायेदारी को झेल रहे हैं। हालांकि अधिशासी अभियंता मनोज कुमार द्वारा ऐसे किसानों को राहत दिलाने के लिए जमा रसीदों को चालानों से मिलान कराया जा रहा है। अब तक करीब 15 किसानों को राहत मिल सकी है।
भ्रष्टाचार से रहा है निगम का पुराना नाता-
हापुड़ में पावर कॉरपोरेशन का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार यहां होता आया है। लेकिन कड़ी कार्रवाई के अभाव में आरोपी खुले घूम रहे हैं।
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कोट
अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि नलकूप घपले से जुड़े रिकॉर्ड की तलाश टीम द्वारा करायी जा रही है। बिल जमा करने वाले किसानों को जल्द ही इस बकायेदारी से राहत मिल जाएगी।
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