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डॉल्फिन के संरक्षण पर जोर, जागरूकता के लिए चलेगा अभियान

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डॉल्फिन के संरक्षण पर जोर, जागरूकता के लिए चलेगा अभियान
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हापुड़। गंगा की लहरों में अठखेलियां करने वाली डॉल्फिन के नए सदस्य जुड़ने से विभागीय अधिकारी उत्साहित हैं। गंगा में डाल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी के लिए इनके संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए विश्व प्रकृति निधि (डब्लूडब्लूएफ) और वन विभाग तटवर्ती गांवों और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाकर न सिर्फ लोगों को जागरूक करेगा, बल्कि डॉल्फिन के बारे में सही जानकारी भी देगा।
गंगा में डॉल्फिन का सर्वे अक्तूबर माह में किया गया था, जिसमें इनकी गिनती की गई थी। बिजनौर बैराज से नरौरा बुलंदशहर तक डाल्फिन की संख्या 35 से बढ़कर 41 हो गई है। गढ़ के गांव पूठ से बुलंदशहर के नरौरा तक पांच साल में डॉल्फिन की संख्या 22 से बढ़कर 36 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर डॉल्फिन के संरक्षण और सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई थी। योजना के तहत हापुड़ के ब्रजघाट से बुलंदशहर के नरौरा तक करीब 85 किमी क्षेत्र को रामसर साइट घोषित करते हुए इस क्षेत्र में डॉल्फिन का संरक्षण शुरू किया गया था। गंगा में डॉल्फिन की बढ़ती संख्या और संरक्षण के लिए अब और नए प्रयास किए जा रहे हैं। संरक्षण और इनकी सुरक्षा के विश्व प्रकृति निधि (डब्लूडब्लूएफ) और वन विभाग तटवर्ती गांवों और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएगा।
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डब्लूडब्लूएफ के सीनियर कॉर्डिनेटर संजीव यादव ने बताया कि गंगा में डॉल्फिन की संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छे संकेत हैं। सबसे अहम बात है कि गंगा में डॉल्फिन के बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंगा का माहौल इनके लिए मुफीद हो रहा है। ऐसे में अब इनके और अधिक संरक्षण की आवश्यकता है। ऐसे में विभाग माई गंगा माई डॉल्फिन अभियान के अलावा एक और जागरूक अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत टीमें तटवर्ती गांवों के साथ साथ डॉल्फिन को लेकर दूसरे लोगों को भी जागरूक करेगी। हापुड़ में भी अगले माह स्कूलों और जगह जगह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। जिसके तहत जागरूकता के साथ बच्चों को इनके विषय में पूरी जानकारी दी जाएगी। ताकि इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों से शेयर किया जा सके।
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डॉल्फिन की संख्या बढ़ाने के किए जा रहे प्रयास
- अधिकारियों के अनुसार डॉल्फिन की संख्या बढ़ाने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए गए हैं। साथ ही इनका शिकार न हो, इसके लिए गंगा के किनारे पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। साथ ही जीपीएस की मदद से भी गंगा की गहराई में विचारण करने वाली डॉल्फिन की लोकेशन पर नजर रखी गई। खासतौर पर बच्चों की गतिविधियों पर नजर बनाई जा रही है। गंगा के पानी के पहले से अधिक साफ होने से भी इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसी का नतीजा है कि डाल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
बिजनौर से नरौरा तक कब रही कितनी डॉल्फिन ---
वर्ष संख्या
2015 22
2016 30
2017 32
2019 35
2020 41
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