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मार्केटिंग की ट्रेनिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में कंपनी का माल सीज

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फोटो संख्या- 22,23,24
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करोड़ों की ठगी करने वाली फर्जी कंपनी का माल जब्त
- मेरठ रोड स्थित एक कंपनी पर पुलिस ने मारा छापा, नौकरी के नाम पर युवकों से ठगी का मामला
- एक कर्मचारी की हत्या के बाद हुआ ठगी का भंडाफोड़, कंपनी के 6 कर्मचारी पुलिस पहले ही कर चुकी है गिरफ्तार
माई सिटी रिपोर्टर
हापुड़। मार्केटिंग की ट्रेनिंग के नाम पर हजारों युवाओं से करोड़ों की ठगी करने वाली कंपनी के मेरठ रोड स्थित कार्यालय पर पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार की दोपहर छापा मारकर वहां रखा लाखों का माल सीज कर सील कर दिया। बरामद माल के सैंपल जांच के लिए लैब भेेजे गए हैं। पुलिस ने कंपनी के प्रबंधक समेत छह लोग 14 अगस्त को गिरफ्तार कर लिए थे।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दादरी के जंगल में हरियाणा के पानीपत के गांव कचरौली निवासी युवक सोमनाथ की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। मृतक मेरठ रोड स्थित हिना इंटरप्राइजेज कंपनी का कर्मचारी था और उसने अपने इलाके के लोगों से नौकरी का झांसा देकर काफी रुपये ऐंठ लिए थे। पंद्रह हजार रुपये न चुकाने पर हरियाणा के ही तीन युवकों ने उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को अगले ही दिन गिरफ्तार भी कर लिया था।
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मृतक के पिता ने तीनों आरोपियों के अलावा हिना इंटरप्राइजेज कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच में पता चला कि कंपनी के कर्मचारी मार्केटिंग की ट्रेनिंग दिलाकर नौकरी दिलाने के नाम पर हजारों युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करा चुके हैं।
हापुड़ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक महावीर सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में कंपनी के मालिक/प्रबंधक बिहार निवासी मुद्दसीर आलम, हरदोई निवासी बब्लू, पीलीभीत निवासी जिशान, रामपुर निवासी राजकुमार, बलरामपुर निवासी इश्तियाक, मिलक निवासी रामकुमार और इटावा निवासी कृपा शंकर 14 अगस्त को गिरफ्तार किये जा चुके हैं।
कोतवाली प्रभारी ने खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी पवन कुमार आदि के साथ सोमवार की दोपहर मेरठ रोड स्थित कंपनी के कार्यालय पर पहुंचे। टीम ने वहां मौजूद माल को जब्त करते हुए इसके सैंपल भी जांच के लिए लैब भेज दिए। इसके बाद कंपनी को सील कर दिया गया। टीम में जिला ओषधी निरीक्षक लवकुश प्रसाद, ओमप्रकाश सिंह, संदीप कुमार, शिवदास सिंह, सौरभ सोनी, धर्मपाल और साइलो चौकी प्रभारी विनित मलिक भी मौजूद रहे।
युवाओं को भ्रमित करने के लिए दिया जाता था प्रशिक्षण
इस फ्राड कंपनी द्वारा युवाओं को भ्रमित करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता था। युवाओं को मार्केटिंग के गुर सिखाने का झांसा देकर उनसे विभिन्न कंपनियों का करीब 15 हजार रुपये का माल ट्रेनिंग देने के बाद डोर टू डोर बेचने के लिये थोप दिया जाता था। इतना ही नहीं प्रोसेस फीस के नाम पर काफी रकम कंपनी में जमा करा देते थे।
ठगी के शिकार प्रशिक्षणार्थी नहीं देते थे कोई जानकारी
हापुड़। मार्केटिंग की ट्रेंनिंग के नाम पर ठगी का शिकार होने वाले प्रशिक्षणार्थी किसी को भी कोई जानकारी नहीं देते थे। बल्कि हर एक प्रशिक्षणार्थी अपने साथ तीन और युवाओं को झांसा देकर लाने की जिम्मेदारी सहज ही निभाता था। इन तीनों के आने पर उनसे भी इसी तरह तीन तीन और ट्रेनिंग के नाम पर युवाओं को फंसाया जाता था।
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इसी का परिणाम था कि इस कंपनी में मार्केटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की संख्या एक समय में हजारों में रहती थी। इनका एक ट्रेनिंग सेंटर पुलिस लाइन के बराबर में था जबकि सर्वोदय कालोनी के पास था। जबकि आसपास की कालोनियों में एक-एक कमरे में पांच से 6 तक युवक रहते थे। दिलचस्प बात यह है कि सुबह 7 बजे से ही उक्त युवा नहा धोकर पैंट शर्ट और जूते पहनने के बाद एक डायरी हाथ में लेकर ट्रेनिंग सेंटरों की ओर निकल पड़ते। उक्त समय ऐसा होता कि आसपास की तमाम सड़कों पर मानो जन सैलाब जैसा नजारा होता था। इन युवकों को प्रशिक्षण के दौरान यह पाठ शक्ति के साथ पढ़ाया जाता कि कोई भी इस प्रशिक्षण या धंधे के बार में किसी को भी कोई जानकारी नहीं देगा। अब ठगी का रहस्य खुलने पर बेचारे खाली हाथ वापस लौट रहे हैं।
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