आलू के दाम लुढ़के, किसान परेशान
हापुड़। एक बार फिर आलू पर मंदे की मार से किसान मायूस हैं। हालात यह हैं कि 50 किलो आलू से भरा कट्टा सिर्फ 350 रुपये का बिक रहा है। जबकि फुटकर विक्रेता 20 रुपये किलो आलू बेचकर उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं।
इस साल आलू की फसल बंपर थी। सीजन में 400 रुपये कट्टा तक आलू बिका लेकिन अधिकांश किसानों ने आलू शीतगृहों में रख दिया था। कुल मिलाकर हापुड़ जिले के शीतगृहों में करीब 20 लाख कट्टा आलू रखा गया था। इसमें करीब 18 लाख कट्टा आलू मोटा था जबकि करीब 2 लाख कट्टा आलू बीज का था।
आलू के कारोबारी अनिल गुप्ता का कहना है कि अब तक सिर्फ 15 प्रतिशत आलू की शीतगृहों से निकासी हो सकी है। ऐसे में आलू का भाव काफी गिरने से किसान चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि इस माह में आलू के रेट बढ़ने की संभावना कम है। हालांकि आगे के महीनों में आलू पर उछाला आ सकता है। इसका कारण हसन (कर्नाटक) में आलू की नयी फसल को बाढ़ से भारी नुकसान होना है। इसी के साथ अगर पंजाब में आलू की बुवाई मेें विलंब हुआ तो इसका लाभ यहां के किसानों को मिल सकता है।
मेरठ रोड सर्वोदय कालोनी निवासी नरेंद्र त्यागी आलू उत्पादक किसान हैं। उनका कहना है कि आलू की खेती ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। इस बार आलू महंगा बिकने की उम्मीद थी लेकिन 350 रुपये प्रति बोरा से अधिक का रेट किसानों को नहीं मिल रहा। चिप्सोना आलू जरूर 100 रुपये बोरा महंगा है। हालांकि फुटकर विक्रेता 20 रुपये किलो आलू बेचकर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। इससे साफ है कि फुटकर विक्रेता 350 का कट्टा खरीद कर 1000 रुपये में बेचते हैं।