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पुष्पावती पूठ बनेगा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

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पुष्पावती पूठ बनेगा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
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गढ़मुक्तेश्वर। पुष्पावती पूठ के गंगा तट पर घाट का निर्माण समेत अन्य सुविधाओं के लिए शासन की ओर से पहली किस्त जारी कर दी गई है। दो करोड़ की लागत से घाट निर्माण, सुलभ शौचालय और महिलाओं के लिए चेजिंग रूम का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा पूठ के प्राचीन मंदिरों की जीर्णोद्धार पर्यटन विभाग की ओर से कराया जाएगा।
वर्ष 2015 में पुष्पावती पूठ में आगमन के दौरान तत्कालीन जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने इसे देश का पहला गंगा ग्राम घोषित किया था। लेकिन व्यवस्थाएं न होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। घाट कच्चे हैं और चेजिंग रूम न होने से महिलाओं को खुले में वस्त्र बदलना पड़ता है। लेकिन अब नीति आयोग के उपाध्यक्ष की पहल पर पूठ के घाटों की तस्वीर बदलने वाली है।
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नीति आयोग उपाध्यक्ष ने गोद लिया है गांव
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने करीब तीन साल पहले पूठ और आलमनगर गांवों को गोद लिया था। इसके बाद से उन्होंने पूठ व आलमनगर को विकसित करने की कवायद शुरू कर दी। कई बार गांवों का दौरा किया। इसके अलावा दिल्ली में हुई बैठक में एनएमसीजी, पर्यटन विभाग, सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों को पूठ गंगा घाट का सुंदरीकरण कराने का निर्देश दिया।
दो करोड़ की राशि मिली, आज घाट का शुरू होगा निर्माण
एनएमसीजी के डिप्टी डायरेक्टर ओपी शर्मा ने बताया कि तट पर 25 मीटर लंबे और 30 मीटर चौड़े घाट के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार हो चुकी है। इसके लिए शासन से दो करोड़ रुपये की राशि भी मिल चुकी है। घाट निर्माण के साथ ही सुलभ शौचालय और महिलाओं के लिए वस्त्र बदलने के कक्ष का निर्माण कराया जाएगा। वहीं प्लेटफार्म पर दो पौधे भी लगाए जाएंगे। पर्यटन विभाग द्वारा पूठ के प्राचीन गंगा मंदिर, शिव मंदिर समेत अन्य मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया जाएगा। इसके लिए अलग से धनराशि उपलब्ध होगी।
गंगा सेवक 14 वर्षों से कर रहे सफाई
गांव बहादुरगढ़ निवासी गंगा सेवक भारत भूषण गर्ग, लोक भारती के मूलचंद आर्य, महेश केवट पिछले 14 वर्षों से लगातार पुष्पावती पूठ के गंगा घाट पर सफाई, पौधरोपण समेत अन्य अभियान चलाए हुए हैं। सभी ने समय-समय पर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह, एनएमसीजी डीजी राजीव रंजन मिश्र, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार समेत अन्य के समक्ष कई बार पूठ के विकास की मांग की है।
एतिहासिक गांव है पुष्पावती
भारत भूषण गर्ग ने बताया कि पुष्पावती महाभारत कालीन गांव है। यह पांडवों की राजधानी का एक भाग था। उस समय पुष्पावती नाम का एक भव्य उद्यान था, जो हस्तिनापुर के शासकों की सैरगाह माना जाता था। पांडवों की महरानी द्रोपदी भी अक्सर पुष्पावती आया करती थीं। यह स्थान ऊंचे टीले पर स्थित है। गुरु द्रोणाचार्य की तपोभूमि, कौरव-पांडवों की परीक्षा स्थली और एकलव्य की साधना स्थली रहा है। ऐसे प्रमाण ग्रंथों में मिलते हैं।
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कोट्स
शासन द्वारा दो करोड़ की राशि घाट निर्माण के लिए जारी की जा चुकी है। सोमवार से पुष्पावती पूठ के गंगा तट पर पक्के घाट का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। काम जल्द और गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाएगा। -ओपी शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, एनएमसीजी
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