ब्रजघाट के श्मशान घाट पर तीन घंटे इंतजार, एक दिन में 101 दाह संस्कार
गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना संक्रमण के कहर के चलते मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में श्मशान घाटों पर भी अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लगी है। ब्रजघाट में पिछले एक सप्ताह में शवों की संख्या बढ़ गई है। बुधवार को भी 101 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। दाह संस्कार करने आए परिजनों को लगभग तीन-तीन घंटे का इंतजार करना पड़ा। पालिका ने अव्यवस्था से बचने के लिए घाट की लंबाई बढ़ा दी है। जिससे एक साथ कई शवों का अंतिम संस्कार हो सके।
कोविड-19 की दूसरी लहर में संक्रमण से ग्रस्त लोगों की मौत का आंकड़ों भी बढ़ने लगा है। जिसके चलते हर तरह मातम सा छाया हुआ है। गंगानगरी ब्रजघाट के शमशानघाट पर चारों तरफ चिताएं जलतीं दिखाई दे रही हैं। करीब एक सप्ताह से दाह संस्कार की संख्या रोजाना 100 से 125 तक पहुंच रही है। हाल यह है कि अंतिम संस्कार करने के लिए आए परिजनों का इंतजार भी बढ़ गया है। एक बार में यहां पर लगभग 20 शवों का अंतिम संस्कार हो सकता है ऐसे में लोगों को तीन-तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
शमशानघाट पर मृतकों के नाम की रजिस्टर में एंट्री करने वाले कर्मचारी राजीव ने बताया कि सोमवार को 123, मंगलवार को 125 मृतकों का दाह संस्कार किया गया। जबकि मंगलवार की देर रात से बुधवार शाम पांच बजे तक 101 शवों का अंतिम क्रियाकर्म किया गया। जबकि मृतकों का आना अभी जारी है। वहीं गांव लठीरा के कच्चे घाटों पर भी कई शवों का दाह संस्कार किया गया। राजीव ने बताया कि गत वर्ष अप्रैल माह में प्रतिदिन 40 से 50 मृतकों का दाह संस्कार कराया जाता था। उस दौरान कोरोना संक्रमण से मृत्यु के बाद केवल चंद लोगों के शव ही ब्रजघाट पहुंचते थे। इस बार इस पर कोई रोक नहीं है।
शमशानघाट पर मृतकों के दाह संस्कार की संख्या में भारी इजाफा होने के चलते स्थान की कमी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। जिसे देखते हुए पालिका कर्मियों को निर्देश देकर गंगा तट पर शमशानघाट के पास खाली भूमि की सफाई कराकर घाट की लंबाई बढ़ा दी गई है। इस समय 30 चिताएं एक साथ लगाई जा सकती हैं। शमशान घाट समेत आसपास के क्षेत्र को कई बार सैनिटाइज कराया जा रहा है। ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
-सोना सिंह, पालिका चेयरमैन संवाद