भाकियू की मासिक पंचायत में छाया गन्ना भुगतान का मुद्दा
गढ़मुक्तेश्वर। भाकियू की मासिक पंचायत में बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा छाया रहा। वहीं शासन-प्रशासन से दीपदान की परंपरा का निर्वहन करने के लिए गंगा तट पर व्यवस्था कराने की मांग भी की गई। इसके अलावा विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर डीएम के नाम एक ज्ञापन भी तहसीलदार को सौंपा।
गढ़ तहसील परिसर में मंगलवार को भाकियू की मासिक पंचायत का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता जसवंत गिरि और संचालन संदीप चौधरी ने किया। पंचायत में दिनेश खेड़ा और जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सिंभावली व ब्रजनाथपुर शुगर मिलों का वर्तमान पेराई सत्र आरंभ हुए भी दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक भी मिलों द्वारा किसानों को गत वर्ष के गन्ने का पूरा भुगतान नहीं किया गया है। जिससे आगामी दिवाली के त्योहार पर भी किसानों की जेब खाली रहेंगी। कहा कि शासनदेश और गन्ना एक्ट के तहत किसानों को जल्द से जल्द ब्याज समेत भुगतान दिलाया जाए। अफजाल प्रधान, दिनेश त्यागी ने कहा कि जब तक बकाया भुगतान न हो, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के नलकूपों और घरेलू कनेक्शन बकाएदारी में न काटे जाएं।
वहीं युवा जिलाध्यक्ष जीते चौहान, वरिष्ठ नेता शब्बू चौधरी ने कहा कि कार्तिक माह की चतुर्थदशी पर दीपदान की परंपरा महाभारत कालीन है। लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन की मांग पर शासन द्वारा मेला आयोजन और दीपदान पर रोक लगा दी है। कहा कि धार्मिक आस्था और पूर्वजों की आत्मशांति से जुड़ी दीपदान की परंपरा के निर्वहन की अनुमति दिए जाने के साथ ही जिला पंचायत और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
किसानों ने गन्ने की पत्ती को मिलों द्वारा खरीदने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने और किसानों का उत्पीड़न न किए जाने की भी मांग उठाई। इसके अलावा माइनरों व रजवाहों की सफाई कराकर आखिरी टेल तक पानी पहुंचने, रजवाहों में जल्द से जल्द पानी छोड़े जाने की भी उठी। भाकियू ने जनपद में तीन-तीन स्थानों पर टोल वसूली पर भी रोष जताया। सभी समस्याओं के समाधान के लिए डीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की भी चेतावनी दी गई। पंचायत के दौरान नानई के किसान महेंद्र सिंह चौहान और रामप्रसाद जाटव ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की, जिन्हें जिलाध्यक्ष ने संगठन की टोपी पहनाकर शामिल किया।
इस मौके पर पीके वर्मा, अफजाल प्रधान, मौहर सिंह, हरिराम सिंह, गुलजार खां, सुभाष चौहान, सलेख चंद, बाबर सैफी, संजय सिंह, ब्रजपाल सिंह, प्रमोद कुमार त्यागी, इंद्रपाल सिंह, जयबीर सिंह, नंदकिशोर, मनबीर सिंह, मदन कश्यप, कुंवरपाल सिंह, श्याम सुंदर त्यागी, मनीष कुमार, अनमोल चौहान, अशोक कुमार, सुरेंद्र सिंह, गुलफाम खां समेत सैकडों कार्यकर्ता मौजूद रहे।