प्रदूषण फैलाने वाले गन्ना क्रेशर और कोल्हुओं पर कसेगा शिकंजा
गढ़मुक्तेश्वर। प्रदूषण फैलाने वाले गन्ना क्रेशर और कोल्हुओं के खिलाफ तहसील प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जाएगा। सर्दियों में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
वेस्टर्न यूपी की गन्ना बैल्ट में पांच हजार से अधिक कोल्हू-क्रेशर संचालित हो रहे हैं, जिनमें सैकड़ों कोल्हू-क्रेशर गढ़ तहसील क्षेत्र में प्रदूषण फैला रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो गढ़, ब्रजघाट, सिंभावली, बहादुरगढ़, नानपुर, झड़ीना क्षेत्र में इन दिनों तीन सौ से भी अधिक कोल्हू-क्रेशरों का संचालन हो रहा है। एक कोल्हू पर प्रतिदिन औसतन सवा सौ क्विंटल गन्ने की पेराई हो जाती है, जिन पर 25 से लेकर 30 हॉर्स पावर वाले डीजल इंजनों का इस्तेमाल किया जाता है। जहां गुड़ पकाने के लिए प्रतिदिन दस हजार कुंतल से अधिक खोई, पत्ती, पुआल, रबर और प्लास्टिक अवशेष भी जलाए जा रहे हैं। जिनका धुआं वाष्पीकरण होने से ऊपर नहीं उठ पाता है, ईंट भट्ठों की चिमनी की ऊंचाई 50 फिट से अधिक होती है। लेकिन फिर भी वे आबादी में नहीं लग पाते हैं, लेकिन कोल्हू-क्रेशरों पर चिमनी की ऊंचाई महज चार पांच फिट तक होती है। लेकिन अब कोल्हू-क्रेशरों पर भी बहुत जल्द शिकंजा कसा जाएगा। एनसीआर समेत क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ऐसे कोल्हू-क्रेशरों के खिलाफ अभियान चलाएगा।
--क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि वातावरण में धुएं का गुबार छाया रहने से ओजोन परत में छेद होने से नाइट्रोजन चक्र प्रभावित होने पर फसलों का विकास भी प्रभावित होता है, जबकि इथाइलिन गैस का प्रभाव बढने से बागों में आने वाले फलों पर बीमारी पांव पसार लेती हैं।
वहीं एसडीएम विजयवर्धन तोमर का कहना है कि प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले कोल्हू-क्रेशरों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। ताकि क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण से निजात मिल सके।