बिजनौर बैराज से 74 हजार क्यूसेक जल छोड़ा गया, हड़कंप
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में आज बढ़ोतरी हो सकती है। बिजनौर बैराज से 74 हजार क्यूसेक से अधिक जल छोड़ा गया है। इसके गढ़ क्षेत्र में सोमवार की सुबह पहुंचने की संभावना है। इसके बाद गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होगी। इसके चलते लोग परेशान हैं। इधर शनिवार को गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि जलस्तर में गिरावट के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली है।
गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला लगातार बना हुआ है। एक सप्ताह तक उफान पर रही गंगा के जलस्तर में पिछले 48 घंटों में 12 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज हुई है। गंगा के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला चालू होने से ग्रामीणों और प्रशासन में बाढ़ की आशंका कुछ हद तक कम हुई है। लेकिन अभी भी बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है, जिससे ग्रामीण डरे हुए हैं। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों के अनुसार शनिवार को एक बार फिर बिजनौर बैराज से 74हजार 733 क्यूसेक अतिरिक्त जल छोड़ा गया है। जिसके सोमवार की सुबह तक गढ़ क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है। बाढ़ की आशंका कम होने के बावजूद भी आबादी और जंगल में जलभराव के कारण किसानों और ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इधर जलस्तर में दो सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज हुई, जिससे शनिवार को जलस्तर 198.81मीटर(समुद्र तल से) के निशान पर रहा। वहीं रविवार को भी 10 सेंटीमीटर की गिरावट होने पर जलस्तर 198.71 मीटर के निशान पर पहुंच गया।
ग्रामीण सोनू चौहान का कहना है कि आबादी के बीच पानी अभी भी भरा हुआ है। जिसमें बदबू आना शुरू हो गया है। जलभराव, गंदगी से कोरोना संक्रमण के साथ ही अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना भी बन रही है।
जितेंद्र कुमार का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत पशुओं के लिए चारे की सामने आ रही है। आसपास के जंगल में खेतों में चारों तरफ पानी भरा हुआ है। जिससे खेतों से चारा लाना चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों को दूर-दराज के क्षेत्रों से चारे की व्यवस्था करनी पड़ रही है। किसान गजेंद्र सोलंकी का कहना है कि घरों के आसपास पानी भरने से पशुओं को बांधना काफी मुश्किल हो रहा है। वहीं सही ढंग से व्यवस्था न होने के चलते पशुओं को भूसा और सूखा चारा खिलाना पड़ रहा है। जिससे पशुओं के बीमार होने की भी आशंका बन रही है। यदि जलस्तर दोबारा बढ़ा, तो ग्रामीणों को पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर भी जाना पड़ सकता है।
कोट
वहीं एसडीएम विजयवर्धन तोमर का कहना है कि गंगा का उफान थमने लगा है। जिससे बाढ़ की आशंका कम होने लगी है। फिर भी जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंच कर लोगों की जांच कर रही हैं। पशु चिकित्सा विभाग को भी गांव-गांव पहुंचकर पशुओं के उपचार का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा यदि किसी भी ग्रामीण को कोई भी परेशानी है तो तहसील मुख्यालय में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा सकता है। ग्रामीणों की हर संभव मदद की जाएगी।