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पौराणिक गंगा मेले को राजकीय मान्यता के नाम पर अब तक झुनझुना मिला

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कार्तिक मेले को मिला राजकीय दर्जा लेकिन बजट नहीं
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गढ़मुक्तेश्वर। पौराणिक खादर मेले को भले ही प्रदेश सरकार ने राजकीय मेले का दर्जा देने का एलान किया हो लेकिन शासन की तरफ से कोई आर्थिक मदद नहीं की गई। जिसके चलते गत वर्ष लगे खादर मेले में ठेकेदारों द्वारा बनवाई गई सड़कें व स्नानघाट आदि का लगभग सवा करोड़ का भुगतान अटका हुआ है। ठेकेदार जिला पंचायत में भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई राहत न मिलते देख अब डीएम से गुहार लगाई है।
गढ़ खादर में प्रतिवर्ष पौराणिक कार्तिक गंगा स्नान मेले का आयोजन होता है, जिसका अतीत महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। कई दशकों से उठती आ रही मांग को प्रदेश की योगी सरकार ने सन 2017 में पूरी करते हुए मेले को राजकीय मान्यता प्रदान की थी, जिसके तहत मेला आयोजन पर खर्च होने वाली सारी रकम शासन स्तर से दी जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत पर गौर करें तो राजकीय मान्यता मिलने के बाद भी पौराणिक मेले की अपेक्षित स्तर पर कोई सुध नहीं ली गई। गत वर्ष जिला पंचायत विभाग से जुड़े जिन ठेकेदारों ने मेले में अस्थाई सड़क, जलाश्यों पर पुल, गंगा किनारे स्नानघाट, पानी का छिड़काव, नावों की व्यवस्था जैसे काम कराए थे। उनका अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। जिसके चलते संबंधित ठेकेदार भुगतान के लिए चक्कर लगाने को मजबूर हैं। जिला पंचायत विभाग ने पिछले साल मेला आयोजन के लिए शासन को 1.62 करोड़ की डिमांड भेजी थी, जिसमें से अब तक महज 30 लाख की धनराशि ही मिल पाई है। जिला पंचायत की तरफ से शासन को बजट के लिए कई बार रिमाइंडर भेजा गया लेकिन शासन स्तर से गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है। ठेकेदार नरेंद्र शर्मा, उमेश गुप्ता, गंगा लहरी, सौरभ शर्मा, अनीता त्यागी ने डीएम को पत्र देकर खादर मेला आयोजन से जुड़ा अपने गत वर्ष का भुगतान जल्द से जल्द अदा कराने की गुहार लगाई है। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने के कारण आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं वहीं अब ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं।
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कोट-
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी प्रणव पांडेय का कहना है कि तीन माह बाद आयोजित होने वाले खादर मेले के लिए शासन स्तर से 40 लाख की रकम भेजी गई है, जबकि सन 2018 की बकाया चल रही रकम के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को रिमाइंडर भिजवाया गया है।
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