शहीद पार्क का जीर्णोद्धार अधर में अटका है
गढ़मुक्तेश्वर। शहीद पार्क का जीर्णोद्धार अधर में अटका हुआ है। इसके चलते पार्क में आवारा पशुओं समेत आसपास में शरारती तत्व मंडराते रहते हैं।
देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिलने के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार द्वारा गढ़ चौपला से हाईवे के बदरखा मोड़ को जाने वाले रास्ते के किनारे शहीद पार्क बनवाया गया था, जिसमें जंगे आजादी के दौरान अपने प्राणों की बलि देने वाले क्षेत्र से जुड़े अमर शहीदों के नामों के साथ ही देश के संविधान की प्रस्तावना भी एक शिलालेख पर अंकित है। स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व मनाए जाने में अब महज तीन दिन का समय ही शेष बच पाया है, लेकिन सुंदरीकरण का काम अधर में अटका होने से आसपास में मलबा पड़ा होने से उचित ढंग में साफ सफाई तक नहीं हो रही है। सुबह से लेकर देर रात कर शहीद पार्क के आसपास आवारा पशुओं के विचरण के साथ ही हर समय शरारती तत्व मंडराते रहते हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा भी फिलहाल शहीद पार्क की सुरक्षा को लेकर कोई बंदोबस्त नहीं किया जा सका है।
अब नहीं दिखता पहले जैसा उत्साह
- ज्योतिषाचार्य पंडित लज्जाराम शर्मा कहते हैं कि करीब चार दशक पहले तक 15 अगस्त की तैयारी कई दिन पहले प्रारंभ हो जाती थीं हर तरफ देश की आजादी के तराने गाए जाते थे और लोग आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द की भावना के साथ प्रभात फेरी निकालते थे। जंगे आजादी के अमर सपूतों का गुणगान होता था, लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस फिल्मी गीत और उन पर फूहड़ नृत्य तक सीमित होता जा रहा है।
स्कूल कॉलेजों तक सिमट कर रह गया है 15 अगस्त
- किसान मेवासिंह कहते हैं पहले और अब के 15 अगस्त में जमीन आसमान जैसा फर्क नजर आने लगा है, क्योंकि उस दौर में हर तरफ देशभक्ति की बौछार रहती थी। अब कौम और मजहब का रंग देशभक्ति के रंग पर भारी पड़ता जा रहा है, जिसके लिए वोट की जुगाड़ करने वाले नेता मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। 15 अगस्त का असल संदेश घर घर पहुंचने की बजाए महज स्कूल कॉलेजों तक सिमट कर रह गया है।
--अंग्रेजों के जमाने के कानून से प्रभावित लोग अपनी आपबीती बताने के लिए फोन नंबर 9412619426 नंबर पर संपर्क करें, जिनके सुझाव और समस्याओं को अमर उजाला में प्रकाशित करने की कोशिश रहेगी।