कोख में पल रहीं बच्चियों के बाद जच्चा की भी जान गई
गढ़मुक्तेश्वर। विशेषज्ञ चिकित्सक के बिना चल रहे अल्ट्रासाउंड द्वारा गलत रिपोर्ट दिए जाने पर पहले कोख में पल रहीं दो बच्ची और फिर ऑपरेशन के दौरान गर्भाश्य में चोट पहुंचने से अधिक खून बहने पर जच्चा की जान भी चली गई।
क्षेत्र के गांव की एक महिला को दर्द होने पर उसके परिजन जून में गढ़ के एक ऐसे ही अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ले आए थे, रिपोर्ट में महिला की कोख में एक बच्ची होने का उल्लेख किया गया था। महिला ने बीते 26 जून को एक बच्ची को जन्म दिया मगर कुछ ही घंटों में वह दुनिया से चल बसी। प्रसव होने के बाद भी महिला का दर्द बंद नहीं हो पाया, जिस पर दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया तो उसमें एक मृत बच्ची महिला की कोख में होने की रिपोर्ट दी गई। महिला की जान बचाने के मकसद से परिजनों ने उसे आननफानन में गढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जहां चिकित्सकों द्वारा मृत बच्ची को कोख से निकालने के लिए किए गए ऑपरेशन में चूक होने से महिला के गर्भाश्य को गहरी चोट पहुंचने से खून बहने लगा। जिसे देख ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के होश उड़ गए, जिसने अपनी विफलता पर परदा डालने के मकसद से जच्चा महिला को कुछ ही घंटों के भीतर आननफानन में मेरठ को रेफर कर दिया था। जहां इलाज के दौरान बृहस्पतिवार की सुबह जच्चा महिला ने भी दम तोड़ दिया। अल्ट्रासाउंड की गलत रिपोर्ट और फिर चिकित्सक द्वारा किए गए ऑपरेशन में हुई चूक से कोख में पल रहीं दो बच्चियों के बाद जच्चा महिला की मौत होने से परिजनों समेत ग्रामीणों में रोष फैल गया, जिन्होंने महिला का अंतिम संस्कार करने के बाद अल्ट्रासाउंड सेंटर और निजी अस्पताल में पहुंचकर हंगामा किया। हालांकि बाद में आपसी समझौता होने पर मामला किसी भी कार्रवाई के बिना निपट गया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि इस घटनाक्रम के संबंध में उन्हें कोई सूचना अथवा शिकायत नहीं मिल पाई है, लेकिन अब पूरे प्रकरण की जांच पड़ताल कराने के साथ ही क्षेत्र में चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण भी कराया जाएगा, जिसमें मानक के विपरीत चलने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील कराकर उनके संचालकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई भी कराई जाएगी।