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डेंगू के मरीजों से फुल प्राइवेट अस्पताल

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डेंगू के मरीजों से फुल प्राइवेट अस्पताल
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स्वास्थ्य विभाग नियंत्रण में बता रहा बीमारी, जबकि 40 से ज्यादा का चल रहा इलाज, कई की हालत नाजुक
हापुड़। जिले में डेंगू की आंधी आ चुकी है, प्राइवेट अस्पतालों के वार्ड में भर्ती बुखार के हर दूसरे मरीज में डेंगू की पुष्टि की गई है। अमर उजाला की पड़ताल में मरीजों ने खुद के डेंगू संक्रमित होने का प्रमाण जांच रिपोर्ट के आधार पर दिखाया। ब्लड प्लेटलेट्स भी 20 से 40 हजार के बीच ही मिली। वर्तमान में 40 से अधिक डेंगू के मरीज जिले के अस्पतालों में भर्ती हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में कुल 21 ही मरीज हैं, जिनमें अधिकांश स्वस्थ भी हो चुके हैं। आंकड़ों में खेल कर अधिकारी इस बीमारी को छुपाने में जुटे हैं।
शहर से लेकर गांवों तक घर घर बुखार फैल रहा है। गाजियाबाद, मेरठ में डेंगू के केस लगातार बढ़ रहे हैं, इन क्षेत्रों से ज्यादा नमी वाला क्षेत्र हापुड़ है। फिर भी यहां स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 21 ही मरीज हैं, यह आंकड़े पूरे साल के हैं, जबकि वर्तमान में यदि प्राइवेट अस्पतालों का सही से जायजा लिया जाए तो प्राइवेट लैब द्वारा की गई पुष्टि के आधार पर डेंगू के मरीजों की संख्या 100 के भी पार हो सकती है।
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अमर उजाला की टीम ने शनिवार को जिले के प्राइवेट अस्पतालों में पड़ताल की। वहां, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दावों के उलट सच्चाई कुछ और ही थी। वार्ड मरीजों से खचाखच भरे थे, जनरल वार्ड में भी जगह नहीं थी। इन मरीजों की जांच रिपोर्ट देखी गई तो अधिकांश की रिपोर्ट में एंटीजन एनएच वन और एंटीबॉडी आईजीजी पॉजिटिव मिले। कुल मिलाकर प्राइवेट लैबों ने इन मरीजों में प्रथम दृष्टा डेंगू की पुष्टि की है, हालांकि अपनी गर्दन बचाने के लिए नीचे एलाइजा टेस्ट और पीसीआर टेस्ट के बारे में भी नोट डाल दिया।
विभिन्न अस्पतालों में 40 से अधिक डेंगू के मरीज भर्ती हैं। मुख्य बात यह है कि इन मरीजों की प्लेटलेट्स बहुत कम हैं, कई मरीज ऐसे मिले जिनकी प्लेटलेट्स महज 20 से 40 हजार के बीच ही थी। डेंगू से पीड़ित मरीज सिर दर्द, तेज तापमान और उल्टियां लगने से परेशान थे। किसी मरीज ने पांच दिन तो किसी ने दस दिन से भर्ती होने की बात कही।
उधर, स्वास्थ्य विभाग के सबसे अधिक ओपीडी वाले गढ़ रोड स्थित सीएचसी की भी पड़ताल की गई। यहां वार्ड में बुखार का कोई मरीज भर्ती नहीं मिला, सिर्फ जच्चा और ऐसे महिलाएं भर्ती थी, जिनके बच्चे नर्सरी में इलाज पा रहे हैं। बुखार के मरीजों को यहां जान बूझकर भी भर्ती नहीं किया जाता। क्योंकि आए दिन जन प्रतिनिधि व जिला स्तरीय अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण करते हैं, ऐसे में निरीक्षण के दौरान यदि बुखार फैलने का सच सामने आ गया तो अधिकारियों की भाग दौड़ बढ़ जाएगी।
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-इन मरीजों ने दिखायी खुद के
डेंगू पीड़ित होने की रिपोर्ट
नूरपुर निवासी बब्लू, हसनपुर निवासी ओमप्रकाश, दोयमी निवासी भूपेंद्र, तगासराय निवासी निशा, गांधी विहार निवासी रमा देवी, मजीदपुरा निवासी आमिर खान, काकोड़ी निवासी गजेंद्र, अर्जुननगर निवासी सिद्धार्थ, केशवनगर निवासी अमित, मजीदपुरा निवासी फिरोज, ईदगाह रोड निवासी साईन, तगासराय निवासी अतुल, कोटला मेवतियान निवासी बुशरा।
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-मरीजों के एलाइजा टेस्ट में झोल-
स्वास्थ्य विभाग ने वैसे तो हर डेंगू संक्रमित मरीज का सैंपल उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के संक्रमित होने का स्वास्थ्य विभाग को पता नहीं, इसके पीछे प्राइवेट लैबों का खेल भी हो सकता है। या फिर यह भी हो सकता है कि बीमारी छुपाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ही सैंपल एलाइजा टेस्ट के लिए नहीं भेज रहा हो।
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-रक्त की पड़ रही आवश्यकता, सरकारी ब्लड बैंक नहीं-
डेंगू के कई मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक ही नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का ही रुख करना पड़ रहा है। कई ग्रुप के ब्लड का स्टॉक खत्म हो रहा है।
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-टीम भेजकर कराएंगे जांच-
प्राइवेट अस्पतालों को डेंगू के मरीजों का सैंपल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 21 मरीज हैं। टीमों को अस्पतालों में भेजकर वास्तविक्ता का पता लगाया जाएगा। डेंगू के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया जा रहा है।--डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।
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