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कोयला, लकड़ी से संचालित 50 फैक्टरियां कराईं बंद

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कोयला और लकड़ी से संचालित 50 फैक्टरियां कराईं बंद
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हापुड़। दिल्ली एनसीआर में छाई धुंध से लोगों का जीना मुहाल है। बढ़ते खतरे को देखते हुए जिले में भी ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने धौलाना औद्योगिक क्षेत्र में जांच की। इस दौरान लकड़ी और कोयले के ईंधन से संचालित 50 फैक्टरियों को बंद कराया गया। जबकि एक निर्माणाधीन फैक्टरी के स्वामी पर 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
दिल्ली एनसीआर के साथ जिले में भी प्रदूषण का स्तर लगातार बिगड़ रहा है। शुक्रवार सुबह एक्यूआई 295 दर्ज किया गया। जबकि आसमान में पूरे दिन धुंध छाई रही। जिसके कारण धूप का प्रभाव भी मामूली रहा। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए यहां भी ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू हो गई हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने धौलाना औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण किया। जहां करीब 50 फैक्टरियां कोयले और लकड़ी के ईंधन से चलती पाई गई। इन फैक्टरियों को तत्काल बंद कराते हुए चेतावनी दी गई है। ताकि किसी भी स्थिति में नियमों का उल्लंघन नहीं हो पाए। इसके अलावा एमजी रोड पर स्थित प्लाट नंबर ए-14 पर एक फैक्टरी भवन का निर्माण कार्य चलता पाया गया। इस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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नियम तोड़ने पर होगा कार्रवाई
प्रदूषण की स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके, इसके लिए जिले में भी निगरानी और बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन न हो, इसके लिए टीमें लगातार क्षेत्र में घूमकर सर्वे करेंगी। इस दौरान जो भी नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा इस दिशा में नगर निकायों द्वारा किए गए कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी। दरअसल, इस मामले में अभी तक नगर पालिकाओं द्वारा कार्य नहीं किए जा रहे हैं। शहर में छिड़काव तक नहीं हो रहा है।
295 पहुंचा प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के स्टेशन इंचार्ज सलमान राणा ने बताया कि फिलहाल दिल्ली और उससे सटे जिलों में प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब है। यहां आमसान में पराली का धुआं बुरी तरह छाया हुआ है। अगले कुछ दिनों में यह धुआं दिल्ली से पूर्व दिशा की ओर बढ़ेगा। यानि के हापुड़ में आने वाले दिनों में और बुरे हालात होंगे। ऐसी स्थिति में हमें और सचेत रहने की आवश्यकता है।
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अस्पताल में मरीज बढ़े, पचास फीसदी प्रदूषण से प्रभावित -
अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। बड़ी बात है कि अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों में 50 फीसदी मरीज प्रदूषण के कारण बीमार हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। इनमें गले में खराश, आंखें में जलन और सांस के मरीज शामिल हैं। परेशान लोगों को चिकित्सक घर में रहने की सलाह दे रहे हैं।
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