महिलाओं के बाद अब प्रदेश सरकार को वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान का ख्याल आया है। उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंच चुके दादा दादी और नाना-नानी को कुछ खुशी के पल मिल सकें,
इसके लिए शासन ने पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर दादा-दादी और नाना-नानी दिवस मनाने की शुरूआत की है। एक अक्टूबर को हर साल यह दिवस मनाया जाएगा। शासन द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि परिषदीय स्कूल हर वर्ष एक अक्टूबर को यह दिवस मनाएंगे।
इसके अंतर्गत बच्चों के दादा-दादी और नाना-नानी को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। बुजुर्गों की रुचि को देखते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं से भी बच्चों को अवगत कराया जाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और लगाव की भावना जागृत करना है। दरअसल, वर्तमान में बुजुर्गों को वह सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जिसके वह हकदार हैं।
सरकार की पहल से इस दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि स्कूलों को आदेशित किया जा रहा है।