कई दिन से पड़ रही गर्मी के बाद बृहस्पतिवार को मौसम बदल गया। बृहस्पतिवार शाम से बूंदाबांदी शुरू हो गयी। इसके बाद करीब पूरी रात बरसात हुई। बारिश से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं अधिकतर फसलों के लिए भी यह बारिश वरदान बनकर आई।
कुछ दिनों से तापमान में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही थी। जबकि गेंहू की फसल के लिए इन दिनों में सर्दी और बरसात जरूरी होते हैं। बृहस्पतिवार शाम से बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बाद पूरी रात झमाझम बारिश पड़ी।
शुक्रवार दोपहर तक बरसात होती रही। कई स्थानों पर हल्के ओले भी गिरे। बरसात से किसानों के चेहरे खिल उठे। इससे तापमान लुढ़का है। अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 07 डिग्री रहा।
बारिश सरसों, गन्ना व गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी। बारिश के एकाएक तेज धूप निकलने से आलू की फसल झुलसने का खतरा हो जाता है। जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार का कहना है कि सर्दियों की यह अच्छी बारिश है।
गेहूं के लिए ऐसी बरसात की काफी आवश्यकता थी। मौसम की अनुकूलता के चलते इस बार जिले में गेहूं की फसल का रकबा बीते वर्ष के मुकाबले करीब 1700 हेक्टेयर बढ़ गया है। बृहस्पतिवार शाम से हुई झमाझम बारिश गेहूं की फसल के लिए वरदान बनकर बरसी।
आलू के रकबे में भी इस बार बढ़ोत्तरी हुई है। जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह का कहना है कि इस वर्ष जिले के 43 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई हुई है। इन दिनों हो रही बारिश फसल के लिए बेहद लाभकारी है।
फसल उत्पादन में भी बंपर बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। इस बार जिले में आलू की फसल का रकबा 3500 हेक्टेयर है, जो बीते वर्ष के मुकाबले 200 हेक्टेयर अधिक है।
जिला उद्यान अधिकारी एनके सहानिया का कहना है कि अगर अगले दो दिन में मौसम नहीं खुला तो आलू की फसल को ब्लाइट की बीमारी लगने का खतरा हो सकता है। फिलहाल फसल को कोई नुकसान नहीं है।
किसान राजवीर त्यागी ने बताया कि जिन किसानों ने पाले से बचाने के लिए आलू की फसल की सिंचाई कर दी थी, उनमें थोड़ा नुकसान हो सकता है।
वैसे पिछले कुछ दिनों में पड़े पाले से जो नुकसान हो रहा था, वह बारिश पड़ने से रुक गया है। उल्लेखनीय है कि यह बारिश गेहूं, गन्ना, सरसों, चना आदि फसलों के लिए सोना बरसने के समान है।