देहात थाना क्षेत्र के ट्याला गांव के ठेके के पास शनिवार तड़के बाइक सवार दो युवकों को अज्ञात वाहन ने कुचल दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। दोनों युवक अतराड़ा गांव से नोएडा में सीआईएसएफ की परीक्षा में शामिल होने जा रहे थे।
दोनों युवकों ने लोकल कंपनियों के हेलमेट लगा रखे थे। हादसे के दौरान दोनों हेलमेट चकनाचूर हो गए। हादसे की जानकारी मिलने पर गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर हंगामा कर जाम लगा दिया। हालांकि काफी देर बाद पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात सुचारु कराय।
मेरठ के मुंडाली थाना क्षेत्र के अतराड़ा गांव निवासी इसरार का पुत्र मुजाहिद (22) गांव के ही रहीसुद्दीन के पुत्र सलमान (18) के साथ बाइक से शनिवार सुबह करीब 4:30 बजे नोएडा के लिए निकले थे। मुजाहिद को सीआईएसएफ की भर्ती परीक्षा देनी थी।
उनकी बाइक ट्याला के शराब के ठेके के पास पहुंची तो हापुड़ की ओर से आ रहा तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में बाइक सवारों को रौंदते हुए निकल गया। हादसे में मुजाहिद और सलमान की मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना पर अतराड़ा के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। काफी देर पुलिस नहीं पहुुंची तो ग्रामीणों ने हंगामा कर जाम लगा दिया। इसकी सूचना पर पुलिस पहुंची और ग्रामीणों को समझाकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
करीब डेढ़ घंटे बाद इस मार्ग पर यातायात सुचारु हो पाया। एसओ देहात दीक्षित त्यागी का कहना है कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से यह हादसा हुआ था। परिजनों की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
हादसे की खबर मिलते ही अतराड़ा में कोहराम मच गया। मुजाहिद का पिता इसरार मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। मुजाहिद की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुजाहिद की चार बहनें भी हैं।
वहीं, सलमान के पिता रहीसुद्दीन अपाहिज हैं। इस हादसे की खबर जैसे ही परिवार को मिली तो मृतक की बूढ़ी मां मुनीजा, चार भाई और चार बहनों में कोहराम मच गया था।
अमर उजाला की टीम जब अतराड़ा पहुंची तो ग्रामीणों का कहना था कि घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी। लगभग डेढ़ घंटे तक घायल युवक औंधे मुंह सड़क पर पड़े रहे। जिससे उनकी शिनाख्त भी देरी से हुई। पुलिस समय से पहुंचती तो उन्हें समय से इलाज मिल जाता।
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों युवक हेलमेट पहने थे। हादसे के बाद हेलमेट चकनाचूर हो गए थे। पुलिस का मानना है कि हेलमेट लोकल कंपनियों के थे। यदि हेलमेट आइएसआई और ब्रांडेड होते तो इनकी जान बच सकती थी।