गढ़मुक्तेश्वर। गंगा का जलस्तर बढ़ने से खादर के गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई गांवों में गंगा का पानी पहुंच गया है। ऐसे में ग्रामीण बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। प्रशासन और संगठनों द्वारा दिए जा रहे राशन के सहारे लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
गंगा का पानी अब जंगलों के बाद खादर के गांवों के रास्तों से लेकर घरों तक पहुंच गया है। इसमें मिश्रीपुर से लेकर गंगा किनारे बसे गांव भगवंतपुर, नयागांव, कुंदैनी की मंढ़ैया, रेता वाली मंढ़ैया, लठीरा, कुदैनी, चक लठीरा, नयाबांस, गड़ावली, छोटी गड़ावली समेत कई गांव प्रभावित हैं। वहीं, आबादी के बाहर रहे रहे लोगों ने बाढ़ के चलते अपने डेरे छोड़कर गांव के नजदीकी तटबंध पर अस्थायी रूप से डेरा डाल लिया है। कई लोग तो खुले आसमान के नीचे रह रहे है। मजदूरी से गुजर-बसर करने वाले इन परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम ने बताया कि शुक्रवार की शाम क्षेत्र में गंगा का जलस्तर 199.17 मीटर (समुद्र तल से) दर्ज किया गया है। वहीं, शाम चार बजे बिजनौर बैराज से एक लाख 65 हजार 715 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। जो शनिवार की शाम तक क्षेत्र में पहुंचेगा। उप जिलाधिकारी श्रीराम सिंह ने बताया कि प्रशासन बाढ़ प्रभावितों तक हर संभव मदद पहुंचा रहा है। किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
बदली दिनचर्या, कामकाज हुए ठप
खादर क्षेत्र में बाढ़ आने के बाद से ग्रामीणों की दिनचर्या ही बदल दी गई है। सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीण बाढ़ के ही पानी को देखते रहते है। उनको उम्मीद है कि जल्द गंगा का जलस्तर कम होगा और फिर से वह खेतीबाड़ी में जुट जाएंगे, लेकिन पहाड़ों पर हो रही बारिश उनकी उम्मीद पर पानी फेरने का काम कर रही है।
राशन के सहारे कर रहे जीवन यापन
बाढ़ से घिरे गांव के लोग आज कल प्रशासन की तरफ से दी जा रही राहत सामग्री से अपना जीवन ज्ञापन कर रहे है। क्योंकि गांव से दूर जाना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में बच्चों को छोड़ कर ग्रामीण कामकाज पर भी नहीं जा पा रहे है।
भाकियू टिकैत और जनशक्ति ने बांटी खाद्य सामग्री
बाढ़ ग्रस्त गांवों में शुक्रवार को भाकियू टिकैत के मंडल अध्यक्ष जीते चौहान, दिनेश त्यागी समेत अन्य लोगों और भाकियू जनशक्ति के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर ग्रामीणों को खाद्य सामग्री व फलों का वितरण किया। जीते चौहान ने कहा कि सभी समर्थ लोगों को इस परिस्थिति में पीड़ितों के सहयोग के लिए खड़ा होना चाहिए।
बाढ़ के पानी में सब कुछ डूबा
लठीरा के ग्राम प्रधान निरंजन सिंह ने बताया कि पानी ने ग्रामीणों की उम्मीदों को डूबो दिया है। ग्रामीण रोजमर्रा की मजदूरी पर निर्भर रहता है, लेकिन खेत खलिहान पानी से भरे हुए हैं। ऐसे में मजदूरी नहीं मिल रही, बच्चों को खिलाने के लिए दो वक्त की रोटी तक का संकट है।