गढ़मुक्तेश्वर। खादर क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर कम होने लगा है। सोमवार की दोपहर करीब चार बजे तक गंगा का जलस्तर 199.31 मीटर दर्ज किया गया, जो रविवार से 11 सेंटीमीटर कम रहा, लेकिन बाढ़ के परिणाम सामने आने लगे हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के चारे का संकट गहराने लगा है। जबकि जंगल में पॉलेज और सब्जी की फसल लगभग नष्ट हो गई है।
बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा किनारे बसे गांवों की हालत बदहाल हैं। पानी कम होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऊर्जा निगम ने गांवों की बिजली हादसे की आशंका को देखते हुए काट दी थी। इससे गांव के लोग अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। न तो इंवर्टर काम कर रहे हैं और न ही उनके मोबाइल चार्ज हो पा रहे हैं। इससे लोगों के संचार का माध्यम भी कट गया है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार के लिए भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पानी कम होने के बाद स्पष्ट होगा नुकसान का आंकड़ा
खादर क्षेत्र में सर्वाधिक पॉलेज की फसल में तोरी, घीया, टमाटर भिंड़ी आदि फसलों को तैयार किया जाता है। इसके साथ यहां पर धान और गन्ने की फसल बोई जाती है। वर्तमान में बाढ़ आने के बाद सर्वाधिक नुकसान पॉलेज की फसल को हुआ है। बड़ी संख्या में गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है। हालांकि फसलों के प्रभावित होने का आंकड़ा पानी उतरने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। नयाबांस निवासी किसान अजीत ने बताया कि बाढ़ ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। 10 बीघा पॉलेज की फसल बर्बाद हो गई है। गंगानगर निवासी किसान सुदेश ने बताया कि बाढ़ के पानी से पशुओं के चारे का संकट पैदा हो गया है। वहीं तोरई और भिंडी की फसल भी बर्बाद हुई है।
जलभराव वाले गांवों में स्कूल नहीं पहुंच रहे बच्चे
खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि जहां-जहां बाढ़ग्रस्त गांव है। वहां पर बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है। हालांकि जहां पानी नहीं है वहां पर स्कूलों को निंरतर खोला जा रहा हैं। एसडीएम श्रीराम सिंह ने बताया कि बाढ़ के हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है। लाइफ जैकेट, रस्सी, नाव, गोताखोर भी लगाए गए हैं। राहत शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है।