बाढ़ के बाद किसान पानी घटने से तबाह फसलों और भू-कटान से परेशान हैं। जनपद में सबसे पिछड़ा गढ़ खादर का इलाका कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां रहने वाले 95 फीसदी परिवारों की जीविका खेती है। परंतु कुदरत के कहर से यहां के किसानों की हालत बदतर होती जा रही है।
भीषण गर्मी के दौरान बिजली संकट और सूखे जैसे हालात में फसलों को बचाने के लिए किसानों को डीजल पर गाढ़ी कमाई का पैसा फूंकना पड़ा था। जब बरसात हुई तो उफनाई गंगा ने रही सही कसर पूरी कर दी। हाड़तोड़ मेहनत-मशक्कत के बाद उनकी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। वहीं, बहाव तेज होने से गंगा नदी गढ़ की साइड में सैकड़ों एकड़ भूमि का कटान कर उसे अपनी जलधारा में मिला चुकी है।
मेवा सिंह मंढैया किशन सिंह, नौबत सिंह गड़ावली, हाजी उम्मेद गढ़, अमरसिंह इनायतपुर का कहना है कि इस बार मुसीबत पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। गंगा के उफान से जलभराव होने पर फसलें पहले ही बर्बाद हो गई थीं। अब भू कटान से बेशकीमती जमीन भी गंगा लील गई है। परंतु तहसील प्रशासन इसकी रोकथाम कराना तो दूर मौके पर आकर जांच पड़ताल करना भी मुनासिब नहीं समझ रहे है।