राजा भगीरथ की घोर तपस्या भगवान ब्रह्मा ने मोक्ष दायिनी गंगा को स्वर्ग से धरती पर भेजने की प्रार्थना स्वीकार की थी। वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन स्वगत से मां गंगा भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। इसी दिन ब्रज घाट पर गंगा मैया का जन्मोत्सव बनाया जाता है।
आयोजन समिति अध्यक्ष मंगल शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को ब्रज घाट तीर्थनगर में गंगा मां के पंखे की भव्य शोभायात्रा निकलेगी। उन्होंने बताया कि आदि काल में ऋषि कपिल मुनि के श्राप से राजा सगर के 60 हजार पुत्र गंगा सागर में भस्म हो गए थे।
इनकी मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने हजारों वर्ष तक घोर तपस्या की थी। जिस पर भगवान बह्मा ने गंगा मैया को स्वर्ग से धरती पर भेजने की प्रार्थना स्वीकार की। परंतु देवी-देवताओं ने यह कहकर आपत्ति दर्ज कराई थी की गंगा मैया के तीव्र वेग वाली जलधारा से सारी श्रृष्टि नष्ट हो जाएगी।
जिस पर ब्रह्मा ने राजा भगीरथ को भगवान शिव की प्रार्थना कर उन्हें गंगा की तीव्र वेग वाली जलधारा को अपनी जटाओं में समाहित करने का आशीर्वाद लेने को कहा। गंगा मैया वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन स्वर्ग से निकलकर भगवान शिव की जटाओं में आई थी, तभी ने मां गंगा का जन्मोत्सव मनाया जाता है।