सर्किल रेट बढ़ाने की जल्दी में प्रशासनिक अफसरों ने प्रदेश सरकार के आदेश को ही ठेंगा दिखा दिया। जिले के करीब पांच गांवों में सर्किल रेट प्रचलित बाजार मूल्य से करीब दोगुना पहुंच गया है। शासन के आदेश अनुसार इन गांवों में सर्किल रेट को कम करना था।
इस संबंध में रजिस्ट्री विभाग ने डीएम को प्रस्ताव भी दिया भेजा था लेकिन बिना प्रस्ताव पर विचार किए सर्किल रेट बढ़ा दिए गए। सर्किल रेट पर लेनदेन होने के कारण इन गांवों में जमीन खरीदना ग्राहकों के लिए मुश्किल हो गया है।
दरअसल, हर वर्ष सर्किल रेटों में 5-10 फीसदी की वृद्धि कर दी जाती है। बृहस्पतिवार को भी शहर में नए सर्किल रेट लागू कर दिए गए। इस बार भी करीब 10 फीसदी तक सर्किल रेट बढ़ाए गए हैं
लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने शासनादेश के अनुसार जहां सर्किल रेट दोगुने है उसे कम नहीं किया। 25 सितंबर 2015 को जारी शासनादेश के अनुसार ऐसे क्षेत्र जहां सर्किल रेट प्रचलित बाजार मूल्य से अधिक पहुंच गया है।
वहां के सर्किल रेटों में कमी भी की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार इस शासनादेश का हवाला देते हुए रजिस्ट्री विभाग से डीएम को रामपुर, रसूलपुर, फतेहपुर, उपैड़ा, ततारपुर गांवों के सर्किल रेट कम करने का प्रस्ताव भेजा था।
लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने इस प्रस्ताव पर बिना विचार किए ही नए सर्किल रेट लागू कर दिए। सूत्रों की मानें तो इन गांवों में प्रचलित बाजार मूल्य करीब 50-60 लाख रुपये/हेक्टेयर है, जबकि सर्किल रेट करीब 1.13 करोड़ रुपये/हेक्टेयर पहुंच रहा है।