गढ़मुक्तेश्वर। गांव चित्तौड़ा-सालारपुर समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण तेंदुए की दहशत से घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। पांच दिन से वन विभाग की पांच जनपदों की टीम आसपास के जंगल में कांबिंग कर रही हैं। लेकिन अभी तक तेंदुआ नहीं पकड़ा गया है।
25 अप्रैल की सुबह खेतों पर काम करने के दौरान तेंदुए ने पांच किसानों पर हमला घायल कर दिया था। मौके पर मौजूद दर्जनों किसानों ने मुकाबला करते हुए तेंदुए को वहां से भगाया। जिसके बाद घायल किसानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं एक साथ पांच किसानों पर जंगली जानवर के हमले की सूचना से वन विभाग में हड़कंप मच गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पांच जनपदों से वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जिन्होंने तेंदुए की तलाश में घंटों कांबिंग की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। तीन स्थानों पर पिंजरे भी लगाए गए। लेकिन आज तक भी तेंदुआ पिंजरे में नहीं फंस सका है।
पांच दिन बीतने के बाद भी तेंदुए का कोई सुराग नहीं लगने से किसानों में दहशत बढ़ रही है। किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ आसपास के क्षेत्र में ही मौजूद है, जो कभी भी किसी पर भी हमला कर सकता है। लेकिन वन विभाग की टीमें केवल खानापूर्ति कर रही हैं। जल्द से जल्द तेंदुए को पकडऩे के लिए ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं वन क्षेत्राधिकारी करन सिंह का कहना है कि लगातार चार टीम तेंदुए की तलाश में चित्तौड़ा-सालारपुर समेत आसपास के जंगलों में कांबिंग कराई जा रही है। तेंदुए के पंजों के निशान कहीं नहीं मिल पा रहे हैं। पिंजरों पर भी नजर रखी जा रही है। जल्द ही तेंदुए को पकड़ लिया जाएगा।