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आठ दिन पहले भरा विड्रॉल फार्म, कैश मिला कल

Fri, 16 Dec 2016 09:36 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
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बैंक ग्राहक - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के 38 दिन बाद भी शहर और देहात में कैश को लेकर मारामारी मची हुई है। स्थिति यह है कि देहात के बैंकों में आठ दिन पहले भरकर जमा किए गए विड्रॉल फार्म से अब कैश मिल रहा है, जिससे किसानों में जबरदस्त रोष व्याप्त है।
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वहीं, शहर में बैंक खुलते ही लोग लाइन में लगे गए। एक या दो एटीएम को छोड़कर कहीं और कैश नहीं मिला, जिससे लोग परेशान रहे। कुचेसर रोड निवासी धर्मपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने चौपला रोड स्थित सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में आठ दिसंबर को दो हजार रुपये निकालने के लिए विड्रॉल फार्म भरा था,

जिसे बैंक ने जमा कर लिया। पिछले कई दिन से चक्कर काटने के बाद शुक्रवार को बैंक से दो हजार रुपये मिले। यह स्थिति सभी लोगों के साथ है। किसान रामआसरे, बिजेपाल ने बताया कि इस स्थिति से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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किसान के पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उधर, बैंक प्रबंधक गजेंद्र सिंह का कहना है कि चेस्ट से कभी कभार कैश मिलता है। शुक्रवार को भी दो लाख रुपये ही मिले। ऐसे में भुगतान में कई कई दिन लग जाते हैं।

वहीं, शुक्रवार को भी जिले के अधिकांश बैंकों में कैश नहीं पहुंच सका। मुख्य बैंक भी दो ही घंटे में जवाब दे गए। एटीएम सुविधा भी बदहाल है, अधिकांश एटीएम शोपीस बने हुए हैं। गढ़ में भी दोपहर तक बैंकों में कैश खत्म हो गया, जिससे लोग को परेशानी का सामना करना पड़ा।

झड़ीना की सिंडिकेट बैंक शाखा में लगातार चौथे दिन भी कनेक्टिविटी ठप रहने से कैश नहीं बंट पाया। लोगों ने हंगामा करते हुए बैंक कर्मियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्वतंत्र लेखक मंच के राष्ट्रीय सचिव सुबोध त्यागी का कहना है कि झड़ीना शाखा से क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं,

जिन्हें कैश न मिलने से घरेलू खर्च चलाना भी चुनौती बनी हुई है। उधर, बैंक ऑफ बड़ौदा पिलखुवा के शाखा प्रबंधक गजेंद्र सिंह ने बताया कि बैंकों में रुपये जमा करने और निकालने की पूरी व्यवस्था है। भीड़ से निपटने के लिए अतिरिक्त काउंटर लगाकर ग्राहकों को कैश बांटा जाता है।

एलडीएम एपी चतुर्वेदी ने बताया कि बैंको को पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है। इस कारण यह समस्या बन रही है, जितना कैश मिल रहा है, ग्राहकों को उपलब्ध करा दिया जाता है।
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