रेलवे अफसरों की लापरवाही और मनमानी के कारण एफसीआई के हापुड़ रीजनल आफिस को चार सालों में खाद्यान्न की हैंडलिंग पर 10 करोड़ रुपये बेवजह अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि एफसीआई परिसर में पांच करोड़ रुपये लेकर भी रेलवे ने ट्रैक नहीं बिछाया है। ट्रैक बिछाया गया होता तो बेवजह यह दस करोड़ रुपया खर्च नहीं होता। एफसीआई में पहले खाद्यान्न लेकर मालगाड़ी सीधे पहुंच जाती थीं,
लेकिन पिछले सात साल से ट्रैक की पटरियां रिजेक्ट हो गई हैं। इससे खाद्यान्न रेलवे के माल गोदाम पर उतरता है। वहां से ट्रकों में लादकर एफसीआई के डिपो परिसर में जाता है। जबकि नया ट्रैक बिछाने के लिए एफसीआई चार साल पहले पांच करोड़ रुपये रेलवे को दे चुका है।
इस लापरवाही से एफसीआई को अब तक करीब 10 करोड़ की चपत लग चुकी है। सूत्रों का कहना है कि प्रत्येक माह 6 स्पेशल मालगाड़ी एफसीआई का खाद्यान्न लेकर दूसरे प्रदेशों से हापुड़ आती हैं। एक मालगाड़ी में औसतन 53 हजार बोरे खाद्यान्न आता है।
यानि प्रत्येक माह औसतन 3.18 लाख और साल में 38.16 लाख बोरे खाद्यान्न की आवक होती है। इस तरह चार साल में पटरी टूटी होने के कारण 1.52 करोड़ बोरों की आवक रेलवे स्टेशन पर हुई।
एफसीआई को प्रति बोरा खाद्यान्न की हैंडलिंग कराकर ढुलाई कराकर डिपो तक पहुंचवाने पर करीब 6 रुपये खर्च करना पड़ता है। इस तरह चार साल में 9.12 करोड़ रुपये एफसीआई को रेलवे अफसरों की लापरवाही के कारण अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं।
अगर चार साल पहले रेलवे को दिये पांच करोड़ का ब्याज भी जोड़ा जाए तो एफसीआई को 10 करोड़ से अधिक की चपत लगी है। इसके बावजूद रेलवे अफसर सुनने को तैयार नहीं है। अब दोनों मंत्रालयों के अफसरों में खींचतान चल रही है। एफसीआई के रीजनल मैनेजर योगराज शर्मा ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा है।