रिलायंस पावर प्रोजेक्ट से प्रभावित हुए सात गांवों के हजारों किसानों ने चुनाव बहिष्कार का एलान किया है। सरकार की किसान विरोध नीतियों से इन किसानों में जबर्दस्त आक्रोश है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी इन किसानों को अधिग्रहित भूमि पर अब तक मालिकाना हक नहीं मिला है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन नहीं मिल जाती और फर्जी मुकदमे वापस नहीं होते, तब तक वह मतदान नहीं करेंगे। महाराणा संग्राम सिंह किसान कल्याण समिति की बुधवार को एक बैठक हुई। इसमें महासचिव डॉ. युधिष्ठिर सिसौदिया ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी किसानों की जमीन वापस उनके नाम पर राजकीय भूअभिलेखों में दर्ज नहीं की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी अधिग्रहण को असंवैधानिक करार देते हुए भूमि किसानों को वापस करने के आदेश दिए, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया। समिति अध्यक्ष मंगू सिंह राणा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद किसान अपनी भूमि का मालिकाना हक हासिल कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि बारह वर्ष से समिति रिलायंस पावर प्रोजेक्ट द्वारा अधिग्रहित की जमीन लड़ाई लड़ रही है। जब तक बेघर हुए किसानों को भूमि वापस नहीं मिलेगी, तब तक वह मतदान नहीं करेंगे। जब तक राजकीय भू अभिलेखों में किसानों के नाम दर्ज नहीं होंगे, समिति चैन से नहीं बैठेगी।
बैठक में पहुंचे बझैड़ा खुर्द, धौलाना, ककराना, देहरा, कंदोला और जादोपुर सहित सात गांवों के किसान प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से चुनाव का बहिष्कार करने का एलान किया है। बैठक में उपाध्यक्ष डॉ. जयपालसिंह, राकेश सिसौदिया, रामभूल सिंह, देवीशरण फौजी, जब्बार अली, धर्मपाल सिंह, प्रेमपालसिंह सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।