हाईवे 235 पर बन रहे बाईपास को लेकर गांव टियाला, धीरखेड़ा आदि के किसान शनिवार को डीएम कार्यालय पहुंचे और मुआवजा न मिलने की शिकायत की। लोगों ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
मेरठ बुलंदशहर हाईवे पर चौड़ीकरण करने के लिए एनएचआईए के अधिकारी प्रयासरत हैं। इसके अलावा मेरठ, बुलंदशहर व मुरादाबाद हाईवे को जोड़ने के लिए बाईपास बनाया जाना है। उसके लिए हापुड़ के कई गांवों की भूमि अधिग्रहण हो रहा है।
अभी तक सभी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। शुक्रवार को इस संबंध में धीरखेड़ा व टियाला पहुंचे एनएचआईए के अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा था। शनिवार को ग्रामीण डीएम कार्यालय पहुंचे और उनके समक्ष अपनी समस्या रखी।
इनका आरोप है कि एनएचआईए के अधिकारियों ने बिना ग्रामीणों को सूचना दिए खेतों में जेसीबी चला दी। जबकि 60 प्रतिशत किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके अलावा प्रतिकर तो दिया ही नहीं है, बल्कि गांवों में भी अलग अलग रेट दिये हैं।
इसके बावजूद एनएचआईए के ठेकेदार ने टियाला के जंगल में पहुंचकर बिजेंद्र पुत्र हरि सिंह व खेम चंद के खेत में खड़ी फसल उजाड़ दी। किसानों ने कहा कि उन्हें 20 हजार रुपये गज के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया गया तो बाईपास नहीं निकलने देंगे।
डीएम अनिल ढींगरा ने एचएचआईए के अधिकारियों से वार्ता कर संबंधित समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया। शिकायत करने वालों में ललित त्यागी, मनीष, सहदेव, धनेश, जयभगवान त्यागी, दिनेश, अजब सिंह, सुरेंद्र, मनीष शामिल थे।