हापुड़। आलू का भुगतान न होने से नाराज किसानों ने बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दी है। किसानों ने डीएचओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अचानक से अब डीएचओ ने भुगतान कराने में असमर्थता जता दी है। इस पर किसानों ने डीएचओ से लिखित में जवाब मांगा है।
जिले के 126 आलू किसानों का बेंगलुरु की उत्कल ट्यूबर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर करीब 3.50 करोड़ रुपये बकाया है। कई थानों में रिपोर्ट दर्ज होने से लेकर धरने के बाद भी किसानों का भुगतान नहीं हो रहा है। यहां तक कि पिछले दिनों डीएचओ और किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल डीएम के आदेश पर बेंगलुरु भी गया था। किसानों का आरोप है कि उसी दौरान कंपनी के अधिकारियों के साथ उद्यान विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत की। कंपनी के अधिकारियों से लिखित में जो लिया गया है, वह भी संदेह में है। इस कारण किसानों का भुगतान नहीं हो रहा है।
इससे नाराज किसानों ने मंगलवार से जिला मुख्यालय के परिसर में भूख हड़ताल शुरू की। साथ ही अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। बुधवार की शाम तक भी समस्या का समाधान न होने पर अनिश्चितकाल के लिए भूख हड़ताल की घोषणा की गई है।
इस दौरान रामनिवास, धर्मेंद्र कुमार, पुष्पा, संदेश गिल, अनुज शर्मा, योगेंद्र शर्मा, समरपाल सिंह, शौराज सिंह, रविंद्र, अंकित, हरपाल सिंह, संजीव कुमार, पुष्पेंद्र कुमार, गुरजीत सिंह, मनवीर सिंह, सुखपाल, समीर, नगेंद्र, मयंक, कमलेश आदि किसान मौजूद रहे। मामले में जिला उद्यान अधिकारी डॉ. हरित कुमार से बातचीत का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
किसानों ने नहीं कराई स्वास्थ्य की जांच
बुधवार को किसानों के बीच डीएचओ डॉ. हरित कुमार पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। किसानों का आरोप है कि बातचीत के दौरान डीएचओ ने भुगतान कराने में असमर्थता जताने की बात कही। इस पर किसान नाराज हो गए और डीएचओ से लिखित में मांगा। इसके बाद डीएचओ वहां से चले गए। वहीं, मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंची। चिकित्सकों ने किसानों की जांच के लिए उनसे बातचीत की, लेकिन किसानों ने जांच नहीं कराई।
काबू में नहीं आ रहे कंपनी के अधिकारी
किसानों ने बताया कि कई थानों में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी कंपनी के अधिकारी पुलिस के काबू से बाहर हैं। कोल्ड स्टोर से अधिकतर आलू निकलने के बाद भी कंपनी ने उनका भुगतान नहीं किया है। डीएम के साथ हुई बैठक के बाद भी कंपनी के अधिकारियों ने किसानों को भुगतान नहीं किया है। यहां तक कि गुपचुप तरीके से जिले से सभी गायब हो चुके हैं।