फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hapur News: पेशकार ने ऑर्डरशीट व आदेश पर किए डीएम के फर्जी हस्ताक्षर

Sat, 28 Dec 2024 10:20 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
विज्ञापन
विज्ञापन
हापुड़। जिलाधिकारी के पूर्व पेशकार व वर्तमान में गढ़ तहसील में प्रधान सहायक के रूप में तैनात ब्रजभूषण ने बैंक संबंधी एक वाद की पत्रावली व आदेश पर डीएम प्रेरणा शर्मा के ही फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंकों के ऋण संबंधी मामले में आदेश की नकल प्राप्त करने के लिए दूसरे पक्ष से युवक कलक्ट्रेट पहुंचा। प्रकरण की जानकारी के बाद डीएम ने डिप्टी कलक्टर ईला प्रकाश को जांच सौंपी, जिसके आधार पर पूर्व पेशकार पर डीएम के कूटरचित एवं फर्जी हस्ताक्षर का मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं, दूसरा मुकदमा शनिवार की शाम को दर्ज हुआ है, जिसमें कार्यालय से 18 महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की बात सामने आई है।
विज्ञापन

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संदीप कुमार ने डीएम के आदेश पर शुक्रवार की रात और शनिवार की शाम कोतवाली में दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। दर्ज मुकदमे में एडीएम ने बताया कि 20 दिसंबर को जिलाधिकारी के रीडर (पेशकार) की आख्या प्राप्त हुई थी, जिसमें बताया गया कि न्यायालय में एक वाद यूनियन बैंक इंडिया बनाम शुभम कंसल और अन्य का सरफेसी एक्ट यानि बैंकों के ऋण संबंधी मामले में दर्ज है। इस मामले में आदेश की नकल प्राप्त करने के लिए एक पक्ष की ओर से 16 दिसंबर 2024 को ऑर्डर की कॉपी मांगी गई थी। जिसमें सात मार्च 2024 को पहले ही आदेश होना पाया गया। यह आदेश बार कोडेड एवं आरसीसीएमएस पोर्टल पर नहीं मिला। जबकि, नियमानुसार प्रत्येक आदेश बार कोडेड एवं आरसीसीएमएस पोर्टल पर दर्ज होना अनिवार्य होता है।

जानकारी मिलने पर डीएम ने प्रकरण की जांच डिप्टी कलक्टर ईला प्रकाश को सौंप दी। जांच में पाया गया कि ऑर्डरशीट के अनुसार चार अगस्त 2023 को न्यायालय में वाद शुरू हुआ। जबकि, सात मार्च 2024 को अंतिम आदेश पारित होना दर्शाया गया था। लेकिन 12 जनवरी 2024 से सात मार्च 2024 तक की ऑर्डरशीट जिस पृष्ठ पर अंकित है, यह भी कूटरचित तरीके से तैयार की गई थी। इसे पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया था।
विज्ञापन

जांच में पाया गया कि 19 मई 2023 के आदेशानुसार ब्रजभूषण को रीडर (पेशकार) जिलाधिकारी के पद पर तैनात किया गया था। जिसने पत्रावली की ऑर्डरशीट एवं आदेश पर जिलाधिकारी के कूटरचित एवं फर्जी हस्ताक्षर बनाए। जिसके बाद मामले की तहरीर पुलिस में दी गई।

एएसपी विनीत भटनागर ने बताया कि दोनों तहरीर के आधार पर अलग-अलग मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। पूरी गंभीरता के साथ मामले की जांच कराई जा रही है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।



28 लाख रुपये का लिया था ऋण

मोहल्ला देवलोक कॉलोनी निवासी शुभम कंसल ने यूनियन बैंक इंडिया से 2017 में 28 लाख रुपये का ऋण लिया गया था, लेकिन उन्होंने ऋण जमा नहीं किया। इस कारण ब्याज के साथ ऋण बढ़कर 32.5 लाख से अधिक हो गया था। इस मामले में बैंक ने वर्ष 2021 में खाते को एनपीए कर दिया गया था। जिसके बाद बैंक में बंधक उनके प्रभा विहार स्थित करीब 83 वर्ग मीटर की संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए जिलाधिकारी न्यायालय में सरफेसी एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया गया था। इसी वाद के मामले में मकान खरीदने वाले को लाभ पहुंचाने की संभावना है।



नहीं दी गुंडा एक्ट सहित कई महत्वपूर्ण फाइलें

दूसरे मुकदमे के अनुसार, पूर्व पेशकार ब्रजभूषण ने चार्ज छोड़ने के बाद जनपद बनने के वर्ष 2011 से वर्ष 2023 के कुछ अभिलेख जैसे डाक पंजिका, पत्रावलियों को दाखिल दफ्तर किए जाने की पंजिका, न्यायालय की गार्ड फाइल, केस डायरी आदि की फाइलें नए पेशकार को नहीं सौंपी हैं। जिसके कारण विचाराधीन वादों एवं पोर्टल की संख्या में काफी भिन्नता है। गायब फाइलों में उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु एवं खाद्य अधिनियम की एक, वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण व पुर्ननिर्माण एवं प्रतिभूतिहीन प्रवर्तन की एक, गुंडा नियंत्रण अधिनियम की 10 से अधिक फाइलें शामिल हैं। इन फाइलों के गायब करने के उद्देश्य की जांच अब की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें